एक कहावत प्रचलित है- पहला सुख, निरोगी काया। मतलब यह है कि यदि हमारे पास बहुत अधिक धन-संपत्ति हो लेकिन अच्छा स्वास्थ्य नहीं है तो सब बेकार ही है। इसी वजह से शरीर को निरोगी बनाए रखने के लिए सभी कई प्रकार के जतन करते हैं। दवाइयों के साथ-साथ योग भी हमें पूरी तरह स्वस्थ रखता है।
फिर भी यदि किसी व्यक्ति को पथरी या कोई गंभीर बीमारी हो जाए और वह जल्द ठीक नहीं हो रही हो तो निम्न ज्योतिषीय उपचार करें, जल्दी ही फायदा अवश्य मिलेगा।
यदि आपके घर में कोई बहुत दिनों से बीमार है और उसकी बीमारी किसी भी उपचार से ठीक नहीं हो रही है, तो उस व्यक्ति के कमरे में घी का दीपक केशर डालकर रोज शाम को लगाएं। कुछ ही दिनों में रोगी को आराम मिलेगा और वह स्वस्थ हो जाएगा। दवाइयां और अन्य सावधानियां यथावत जारी रखें।
पथरी के ईलाज के लिए:पथरी के ईलाज कराने पर भी यदि वह ठीक नहीं हो रही है, तो बुधवार के दिन स्नान कर हरे वस्त्र धारण करें तथा सुबह ही गाय को हरा चारा खाने को दें तो शीघ्र ही पथरी में लाभ होता है। दवाइयां और अन्य सावधानियां यथावत जारी रखें।
Monday, January 24, 2011
Friday, January 21, 2011
डायबिटीज से बचा जा सकता है
डायबिटीज से बचा जा सकता हैडायबिटीज एक अनुवांशिक बीमारी है। अगर आप डायबिटीज से पीड़ीत हैं या चाहते हैं कि आपके घर में वास्तुदोष होने पर भी डायबिटीज परेशान न करे तो इसके लिए आप नीचे लिखे वास्तु उपाय जरूर अपनाएं।
- घर के दक्षिण-पश्चिम भाग का वास्तु सुधार कर डायबिटीज से बचा जा सकता है।- अपने बेडरूम में कभी भी भूल कर भी खाना ना खाएं।-अपने बेडरूम में जूते चप्पल नए या पुराने बिलकुल भी ना रखें।- मिटटी के घड़े का पानी का इस्तेमाल करे तथा घडे में प्रतिदिन सात तुलसी के पत्ते डाल कर उसे प्रयोग करे।- दिन में एक बार अपनी माता के हाथ का बना हुआ खाना अवश्य खाएं।- अपने पिता को तथा जो घर का मुखिया हो उसे पूर्ण सम्मान दे।- प्रत्येक मंगलवार को अपने मित्रों को मिष्ठान जरूर दे।- रविवार भगवान सूर्य को जल दे कर यदि बन्दरों को गुड़ खिलाये तो आप स्वयं अनुभव करेंगे की मधुमेह शुगर कितनी जल्दी जा रही है।- ईशानकोण से लोहे की सारी वस्तुए हटा लें।
- घर के दक्षिण-पश्चिम भाग का वास्तु सुधार कर डायबिटीज से बचा जा सकता है।- अपने बेडरूम में कभी भी भूल कर भी खाना ना खाएं।-अपने बेडरूम में जूते चप्पल नए या पुराने बिलकुल भी ना रखें।- मिटटी के घड़े का पानी का इस्तेमाल करे तथा घडे में प्रतिदिन सात तुलसी के पत्ते डाल कर उसे प्रयोग करे।- दिन में एक बार अपनी माता के हाथ का बना हुआ खाना अवश्य खाएं।- अपने पिता को तथा जो घर का मुखिया हो उसे पूर्ण सम्मान दे।- प्रत्येक मंगलवार को अपने मित्रों को मिष्ठान जरूर दे।- रविवार भगवान सूर्य को जल दे कर यदि बन्दरों को गुड़ खिलाये तो आप स्वयं अनुभव करेंगे की मधुमेह शुगर कितनी जल्दी जा रही है।- ईशानकोण से लोहे की सारी वस्तुए हटा लें।
चार मणिबंध रेखाएं हो तो........
कलाई पर दिखाई देने वाली तीन रेखाएं भी व्यक्ति के जीवन और भाग्य को भी बहुत अधिक प्रभावित करती है। कलाई पर तीन आड़ी रेखाएं मणिबंध रेखाएं कहलाती है। कुछ लोगों के हाथों में दो मणिबंध रेखाएं होती है, तो कुछ के हाथों में चार मणिबंध रेखाएं भी देखी गई हैं। ये रेखाएं स्वास्थ्य, धन और प्रतिष्ठा की सूचक होती हैं।
- मणिबंध से यदि कोई रेखा निकलकर ऊपर की ओर जाती हुई हो तो उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
- यदि मणिबंध से कोई रेखा निकलकर चन्द्र पर्वत पर जाए तो ऐसा व्यक्ति जीवन में कई विदेश यात्राएं करता है।
- सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यदि कलाई पर चार मणिबंध रेखाएं हो तो उसकी आयु पूरी सौ वर्ष की होती है। जिसके हाथ में तीन मणिबंध रेखाएं होती है। उसकी आयु 75 वर्ष की होती है। दो रेखाएं होने पर 50 वर्ष और एक मणिबंध होने पर उसकी आयु 25 वर्ष होती है।
-यदि मणिबंध रेखाएं टूटी हुई हो या छिन्न-भिन्न हो तो उस व्यक्ति के जीवन में बराबर बाधाएं आती रहती है। इसके विपरित यदि ये रेखाएं निर्दोष और सपष्ट हो तो उसका प्रबल भाग्योदय होता है। -यदि मणिबंध रेखा जंजीरदार हो तो उस व्यक्ति को अपने जीवन में बहुत सारी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।-मणिबंध पर यव यानी गेहू की आकृति के समान चिन्ह हो तो वह चिन्ह सौभाग्य का सूचक है।- मणिबंध रेखा पर द्वीप का चिन्ह हो तो जीवन में अनेक दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है।- जंजीर के समान मणिबंध दुर्भाग्य की सूचक होती है।- दो मणिबंध रेखाएं आपस में मिल जाए तो दुर्घटना से उसका अंग भंग होने का योग बनता है। -मणिबंध की रेखाएं जितनी अधिक स्पष्ट और गहरी होती है। उतनी ही ज्यादा अच्छी मानी जाती है।
- मणिबंध से यदि कोई रेखा निकलकर ऊपर की ओर जाती हुई हो तो उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
- यदि मणिबंध से कोई रेखा निकलकर चन्द्र पर्वत पर जाए तो ऐसा व्यक्ति जीवन में कई विदेश यात्राएं करता है।
- सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यदि कलाई पर चार मणिबंध रेखाएं हो तो उसकी आयु पूरी सौ वर्ष की होती है। जिसके हाथ में तीन मणिबंध रेखाएं होती है। उसकी आयु 75 वर्ष की होती है। दो रेखाएं होने पर 50 वर्ष और एक मणिबंध होने पर उसकी आयु 25 वर्ष होती है।
-यदि मणिबंध रेखाएं टूटी हुई हो या छिन्न-भिन्न हो तो उस व्यक्ति के जीवन में बराबर बाधाएं आती रहती है। इसके विपरित यदि ये रेखाएं निर्दोष और सपष्ट हो तो उसका प्रबल भाग्योदय होता है। -यदि मणिबंध रेखा जंजीरदार हो तो उस व्यक्ति को अपने जीवन में बहुत सारी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।-मणिबंध पर यव यानी गेहू की आकृति के समान चिन्ह हो तो वह चिन्ह सौभाग्य का सूचक है।- मणिबंध रेखा पर द्वीप का चिन्ह हो तो जीवन में अनेक दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है।- जंजीर के समान मणिबंध दुर्भाग्य की सूचक होती है।- दो मणिबंध रेखाएं आपस में मिल जाए तो दुर्घटना से उसका अंग भंग होने का योग बनता है। -मणिबंध की रेखाएं जितनी अधिक स्पष्ट और गहरी होती है। उतनी ही ज्यादा अच्छी मानी जाती है।
Wednesday, January 19, 2011
महिलाओं के लिए गौरीशंकर रुद्राक्ष
शिव पुराण के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति शिवजी से हुई है। सामान्यत: रुद्राक्ष पुरुषों द्वारा ही धारण किया जाता है. इसे महिलाएं भी धारण कर सकती है क्योंकि भगवान के लिए महिला और पुरुष दोनों ही समान है, दोनों पर परमात्मा समान रूप से ही प्रेम और कृपा बरसाते हैं। शिवजी के लिए स्त्री और पुरुष में कोई भेद नहीं है। अत: रुद्राक्ष महिलाएं भी धारण कर सकती हैं। महिलाओं के लिए गौरीशंकर रुद्राक्ष सफल वैवाहिक जीवन के लिए लाभकारी माना गया है। वहीं संतान प्राप्ति और संतान से सुख प्राप्त हो इस मनोकामना की पूर्ति के लिए महिलाओं को गौरी गणेश रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। महिलाओं को रुद्राक्ष करने पर कुछ सावधानियां भी रखनी चाहिए: जैसे- सोते समय रुद्राक्ष उतारकर किसी पवित्र स्थान पर रख देना चाहिए। किसी अन्य व्यक्ति का रुद्राक्ष कतई धारण ना करें और अपना रुद्राक्ष किसी और का ना दें। मासिक धर्म के दिनों में रुद्राक्ष पवित्रता की दृष्टि से धारण नहीं किया जाना चाहिए। उन दिनों में रुद्राक्ष धारण करने पर वह अपवित्र हो जाएगा। रुद्राक्ष
धारण करने के पूर्व किसी विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
तावीज से बच्चों से बीमारी
कुछ लोगों को अधिकांश समय छोटी-छोटी बीमारियां घेरे रहती हैं। छोटे बच्चों के साथ विशेषकर ऐसा होता है।
छोटे बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर माता-पिता और अन्य परिवारजन हमेशा चिंतित रहते हैं। लगभग प्रतिदिन उन्हें डॉक्टर के क्लिनिक का चक्कर लगाना होता है। कई माता-पिता बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए किसी संत-महात्मा या फकीर द्वारा दिए तावीज को बांध देते हैं। तावीज के प्रभाव से बच्चों से बीमारी दूर रहती है।
बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए रावण संहिता का अचूक मंत्र है जिसे सिद्ध कर उसका तावीज पहनाने से बच्चे हमेशा निरोगी बने रहते हैं। इस तावीज को हम घर पर ही बना सकते हैं। तावीज बनाने की विधि इस प्रकार है:
तावीज बनाने के लिए उपयोगी बातें:
इस तावीज को बनाने के लिए आपको इन सामग्रियों की आवश्यकता होगी: शिशु स्वास्थ्य यंत्र, घी का दीपक, अगरबत्ती और मूंगे की माला। इस यंत्र को दिन में किसी भी समय बना सकते हैं। इस यंत्र को सिद्ध करने के लिए सफेद रंग का सूती आसन चाहिए। इस यंत्र को पश्चिम दिशा की ओर मुंह रखकर बनाया जाता है। तावीज बनाने के लिए मंत्र की जप संख्या तीन हजार है और इस जप को तीन दिन में पूरा करना होता है।
तावीज के लिए मंत्र
ऊँ नमो आदेश भगवती भवानी बालकष्ट, बाल रोग, बाल पीड़ा दूर कर सर्व विधि सुख दे, जो मेरा आदेश नहीं माने तो राजा राम की दुहाई।
मंत्र सिद्ध करने की विधि
मंत्र को सिद्ध करने के लिए सफेद रंग के सूती आसन पर बैठकर शिशु स्वास्थ्य यंत्र को सामने रखें और उस पर केशर का तिलक लगाकर, घी का दीपक, अगरबत्ती जलाएं। इस मंत्र को सिद्ध करने का समय तीन दिन है। उपरोक्त मंत्र के तीन दिनों तक प्रतिदिन 1 हजार जप करने हैं। जप करने के लिए मूंगे की माला का प्रयोग करें। तीन दिन में 3 हजार जप होने के बाद मंत्र और यंत्र सिद्ध और कारगर हो जाएगा। तीसरे दिन मंत्र के 3 हजार जप होने के पश्चात यंत्र को रोगी बालक के गले में काले धागे में तावीज बनाकर पहनाया जाना चाहिए। इस तावीज के प्रभाव से बच्चे को बुखार या अन्य रोग नहीं होगा।
सावधानी: इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए तीन दिनों तक धार्मिक आचरण रखें एवं साधक ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करें। तावीज के संबंध में कोई शंका या संशय मन में ना लाए और ना ही किसी दूसरे व्यक्ति को इस संबंध में बताए। ऐसा करने पर तावीज प्रभावहीन हो जाएगा। बच्चे का डॉक्टरी इलाज बंद ना करें।
धारण करने के पूर्व किसी विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
तावीज से बच्चों से बीमारी
कुछ लोगों को अधिकांश समय छोटी-छोटी बीमारियां घेरे रहती हैं। छोटे बच्चों के साथ विशेषकर ऐसा होता है।
छोटे बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर माता-पिता और अन्य परिवारजन हमेशा चिंतित रहते हैं। लगभग प्रतिदिन उन्हें डॉक्टर के क्लिनिक का चक्कर लगाना होता है। कई माता-पिता बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए किसी संत-महात्मा या फकीर द्वारा दिए तावीज को बांध देते हैं। तावीज के प्रभाव से बच्चों से बीमारी दूर रहती है।
बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए रावण संहिता का अचूक मंत्र है जिसे सिद्ध कर उसका तावीज पहनाने से बच्चे हमेशा निरोगी बने रहते हैं। इस तावीज को हम घर पर ही बना सकते हैं। तावीज बनाने की विधि इस प्रकार है:
तावीज बनाने के लिए उपयोगी बातें:
इस तावीज को बनाने के लिए आपको इन सामग्रियों की आवश्यकता होगी: शिशु स्वास्थ्य यंत्र, घी का दीपक, अगरबत्ती और मूंगे की माला। इस यंत्र को दिन में किसी भी समय बना सकते हैं। इस यंत्र को सिद्ध करने के लिए सफेद रंग का सूती आसन चाहिए। इस यंत्र को पश्चिम दिशा की ओर मुंह रखकर बनाया जाता है। तावीज बनाने के लिए मंत्र की जप संख्या तीन हजार है और इस जप को तीन दिन में पूरा करना होता है।
तावीज के लिए मंत्र
ऊँ नमो आदेश भगवती भवानी बालकष्ट, बाल रोग, बाल पीड़ा दूर कर सर्व विधि सुख दे, जो मेरा आदेश नहीं माने तो राजा राम की दुहाई।
मंत्र सिद्ध करने की विधि
मंत्र को सिद्ध करने के लिए सफेद रंग के सूती आसन पर बैठकर शिशु स्वास्थ्य यंत्र को सामने रखें और उस पर केशर का तिलक लगाकर, घी का दीपक, अगरबत्ती जलाएं। इस मंत्र को सिद्ध करने का समय तीन दिन है। उपरोक्त मंत्र के तीन दिनों तक प्रतिदिन 1 हजार जप करने हैं। जप करने के लिए मूंगे की माला का प्रयोग करें। तीन दिन में 3 हजार जप होने के बाद मंत्र और यंत्र सिद्ध और कारगर हो जाएगा। तीसरे दिन मंत्र के 3 हजार जप होने के पश्चात यंत्र को रोगी बालक के गले में काले धागे में तावीज बनाकर पहनाया जाना चाहिए। इस तावीज के प्रभाव से बच्चे को बुखार या अन्य रोग नहीं होगा।
सावधानी: इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए तीन दिनों तक धार्मिक आचरण रखें एवं साधक ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करें। तावीज के संबंध में कोई शंका या संशय मन में ना लाए और ना ही किसी दूसरे व्यक्ति को इस संबंध में बताए। ऐसा करने पर तावीज प्रभावहीन हो जाएगा। बच्चे का डॉक्टरी इलाज बंद ना करें।
Monday, January 17, 2011
यदि शनि ग्रह अशुभ है
जन्मकुंडली शनि ग्रह अशुभ हो या आपको शनि का ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही हो और इसके कारण आपका भाग्य साथ ना दे रहा हो तो नीचे लिखे इस उपाय को अपनाकर आप शनि के अशुभ प्रभाव को कम कर सकते हैं।ग्यारह नारियल जटा सहित कच्चे पानी वाले लें। एक-एक नारियल दायें हाथ से पकड़े और दांये कान की तरफ से बांयी ओर घुमाकर दोनों हाथ लगाकर जल में प्रवाहित करें। ऐसा ग्यारह बार करें।
- सवा किलो जौ काले कपड़े में बांधकर पोटली बनाएं। - सवा किलो कच्चा कोयला काले कपड़े में बांधकर पोटली बनाएं। - सवा किलो चना काले कपड़े में दो कोयले, दो कील बांधकर पोटली बनायें। - एक पोटली में कुछ सिक्के।- श्श्रद्धापूर्वक स्नान करें। उसके बाद एक- एक वस्तुओं को सिर पर से नारियल की तरह घुमाकर श्रद्धापूर्वक जल में प्रवाहित करें।घुमाते समय राहु और शनि देव का नाम लेकर कहें- हे शनि देव और राहु देव, मेरी ग्रह पीड़ा निवृत हो जाए मुझे सुख-शांति,धन-धान्य आदि की प्राप्ति हो।यह कार्य मैं आपकी प्रसन्नता के लिए कर रहा हूं। ऐसे ही हर वस्तु को सिर से घुमाते हुए प्रवाहित कर प्रार्थना करें।
इसके बाद स्नान करें। अपने कल्याण के लिए प्रार्थना करें और पहने हुए कपड़े, जुते, चप्पल सबको घाट पर छोड़ दें। उपरोक्त ग्यारह नारियल वाला उपाय ग्यारह शनिवार करना होगा।
- सवा किलो जौ काले कपड़े में बांधकर पोटली बनाएं। - सवा किलो कच्चा कोयला काले कपड़े में बांधकर पोटली बनाएं। - सवा किलो चना काले कपड़े में दो कोयले, दो कील बांधकर पोटली बनायें। - एक पोटली में कुछ सिक्के।- श्श्रद्धापूर्वक स्नान करें। उसके बाद एक- एक वस्तुओं को सिर पर से नारियल की तरह घुमाकर श्रद्धापूर्वक जल में प्रवाहित करें।घुमाते समय राहु और शनि देव का नाम लेकर कहें- हे शनि देव और राहु देव, मेरी ग्रह पीड़ा निवृत हो जाए मुझे सुख-शांति,धन-धान्य आदि की प्राप्ति हो।यह कार्य मैं आपकी प्रसन्नता के लिए कर रहा हूं। ऐसे ही हर वस्तु को सिर से घुमाते हुए प्रवाहित कर प्रार्थना करें।
इसके बाद स्नान करें। अपने कल्याण के लिए प्रार्थना करें और पहने हुए कपड़े, जुते, चप्पल सबको घाट पर छोड़ दें। उपरोक्त ग्यारह नारियल वाला उपाय ग्यारह शनिवार करना होगा।
Sunday, January 16, 2011
कमल का फूल विष्णु को प्रिय
देवताओं से लेकर तो सुन्दरियों तक फूल देकर हर किसी को प्रसन्न किया जा सकता है। इसलिए देवताओं को फूल चढ़ाएं जाते हैं। यदि आप अपने ईष्ट देवता को उनके प्रिय फूल चढ़ाएं तो आप पर उनकी कृपा बरसने लगेगी।
सूर्य- लाल फूल : सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं। पूजा में सूर्य को लाल रंग के फूल चढ़ाने का विधान हैं। सूर्य को लालिमा प्रिय है। वे तेज के पुंज हैं। लाल रंग तेज का प्रतीक है। इसलिए सूर्य पूजा में लाल कनेर, लाल कमल, केसर या पलाश के फूल चढ़ाने का विधान है।
गणेश- लाल फूल: गणेशप्रथम पूज्य हैं। वे मंगलमूर्ति हैं, मंगल के प्रतीक, मंगल करने वाले। गणोश को लाल रंग के फूल प्रिय हैं। लाल रंग मंगल का प्रतीक है। गणोशपूजा में तुलसी दल का निषेध है लेकिन दुर्वा चढ़ाई जाती है। गणोश विराट व्यक्तित्व वाले हैं लेकिन जिस तरह चूहा उनका वाहन है वैसे ही दुर्वा उन्हें प्रिय है। यह इस बात का प्रतीक है कि जितना बड़ा व्यक्तित्व होगा वह बहुत छोटे के प्रति भी अपनत्व का भाव रखेगा। विराट व्यक्तित्व वाले गणोश को घास के तिनकों के रूप में दुर्वा इसी भाव में प्रिय है।
शिव-सफेद फूल: शिव को कनेर, और कमल के अलावा लाल रंग के फूल प्रिय नहीं हैं। सफेद रंग के फूलों से शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। कारण शिव कल्याण के देवता हैं। सफेद शुभ्रता का प्रतीक रंग है। जो शुभ्र है, सौम्य है, शाश्वत है वह श्वेत भाव वाला है। यानि सात्विक भाव वाला। पूजा में शिव को आक और धतूरा के फूल अत्यधिक प्रिय हैं। इसका कारण शिव वनस्पतियों के देवता हैं। अन्य देवताओं के लिए जो फूल त्याज्य हैं, वे शिव को प्रिय हैं। उन्हें मौलसिरी चढ़ाने का उल्लेख मिलता है। शिव को केतकी और केवड़े के फूल चढ़ाने का निषेध किया गया है।
विष्णु- पीले फूल: विष्णु पीतांबरधारी हैं। पीला रंग उन्हें प्रिय है। सामान्यतया विष्णु पूजा में सभी रंगों के फूल अर्पित किए जाते हैं लेकिन पीतांबरप्रिय होने के कारण पीले रंग का फूल अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। कमल का फूल विष्णु को बहुत प्रिय है।
देवी -लाल और सफेद फूल
लक्ष्मी को लाल और पीले, दुर्गा को लाल और सरस्वती को सफेद रंग के फूल अर्पित करने की परंपरा है। लक्ष्मी सौभाग्य की प्रतीक है अत: लाल रंग प्रिय है। विष्णु की पत्नी होने से वे पीले रंग के फूल से भी प्रसन्न होती हैं। दुर्गा शक्ति की प्रतीक है। लाल रंग शौर्य का रंग है। अत: वे लाल रंग के फूल से प्रसन्न होती हैं। सरस्वती ज्ञान और संगीत की देवी है। शुभ्रता की प्रतीक। उन्हें सफेद रंग के कमल पुष्प अर्पित किए जाते हैं।
सूर्य- लाल फूल : सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं। पूजा में सूर्य को लाल रंग के फूल चढ़ाने का विधान हैं। सूर्य को लालिमा प्रिय है। वे तेज के पुंज हैं। लाल रंग तेज का प्रतीक है। इसलिए सूर्य पूजा में लाल कनेर, लाल कमल, केसर या पलाश के फूल चढ़ाने का विधान है।
गणेश- लाल फूल: गणेशप्रथम पूज्य हैं। वे मंगलमूर्ति हैं, मंगल के प्रतीक, मंगल करने वाले। गणोश को लाल रंग के फूल प्रिय हैं। लाल रंग मंगल का प्रतीक है। गणोशपूजा में तुलसी दल का निषेध है लेकिन दुर्वा चढ़ाई जाती है। गणोश विराट व्यक्तित्व वाले हैं लेकिन जिस तरह चूहा उनका वाहन है वैसे ही दुर्वा उन्हें प्रिय है। यह इस बात का प्रतीक है कि जितना बड़ा व्यक्तित्व होगा वह बहुत छोटे के प्रति भी अपनत्व का भाव रखेगा। विराट व्यक्तित्व वाले गणोश को घास के तिनकों के रूप में दुर्वा इसी भाव में प्रिय है।
शिव-सफेद फूल: शिव को कनेर, और कमल के अलावा लाल रंग के फूल प्रिय नहीं हैं। सफेद रंग के फूलों से शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। कारण शिव कल्याण के देवता हैं। सफेद शुभ्रता का प्रतीक रंग है। जो शुभ्र है, सौम्य है, शाश्वत है वह श्वेत भाव वाला है। यानि सात्विक भाव वाला। पूजा में शिव को आक और धतूरा के फूल अत्यधिक प्रिय हैं। इसका कारण शिव वनस्पतियों के देवता हैं। अन्य देवताओं के लिए जो फूल त्याज्य हैं, वे शिव को प्रिय हैं। उन्हें मौलसिरी चढ़ाने का उल्लेख मिलता है। शिव को केतकी और केवड़े के फूल चढ़ाने का निषेध किया गया है।
विष्णु- पीले फूल: विष्णु पीतांबरधारी हैं। पीला रंग उन्हें प्रिय है। सामान्यतया विष्णु पूजा में सभी रंगों के फूल अर्पित किए जाते हैं लेकिन पीतांबरप्रिय होने के कारण पीले रंग का फूल अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। कमल का फूल विष्णु को बहुत प्रिय है।
देवी -लाल और सफेद फूल
लक्ष्मी को लाल और पीले, दुर्गा को लाल और सरस्वती को सफेद रंग के फूल अर्पित करने की परंपरा है। लक्ष्मी सौभाग्य की प्रतीक है अत: लाल रंग प्रिय है। विष्णु की पत्नी होने से वे पीले रंग के फूल से भी प्रसन्न होती हैं। दुर्गा शक्ति की प्रतीक है। लाल रंग शौर्य का रंग है। अत: वे लाल रंग के फूल से प्रसन्न होती हैं। सरस्वती ज्ञान और संगीत की देवी है। शुभ्रता की प्रतीक। उन्हें सफेद रंग के कमल पुष्प अर्पित किए जाते हैं।
श्री गणेश काटो कलेशं
अगर कोई भी काम आसानी से नहीं होता है हर काम चाहे वह नौकरी से जुड़ा हो, शादी से या अन्य किसी क्षेत्र से रूकावटें और असफलताएं आपका रास्ता रोक लेती हैं तो इसके लिए ये टोटके आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं।किसी के प्रत्येक शुभ कार्य में बाधा आती हो या विलम्ब होता हो तो रविवार को भैरों जी के मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ा कर बटुक भैरव स्तोत्रं का एक पाठ कर के गाय, कौओं और काले कुत्तों को उनकी रूचि का पदार्थ खिलाना चाहिए। ऐसा वर्ष में 4-5 बार करने से कार्य बाधाएं नष्ट हो जाएंगी।
- रूके हुए कार्यों की सिद्धि के लिए यह प्रयोग बहुत ही लाभदायक है। गणेश चतुर्थी को गणेश जी का ऐसा चित्र घर या दुकान पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दायीं ओर मुड़ी हुई हो। इसकी आराधना करें। इसके आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो एक लौंग तथा सुपारी को साथ ले कर जाएं, तो काम सिद्ध होगा। लौंग को चूसें तथा सुपारी को वापस ला कर गणेश जी के आगे रख दें तथा जाते हुए कहें श्री गणेश काटो कलेशं।
- सरकारी या निजी रोजगार क्षेत्र में परिश्रम के उपरांत भी सफलता नहीं मिल रही हो, तो नियमपूर्वक किये गये विष्णु यज्ञ की विभूति ले कर, अपने पितरों की क्वकुशां की मूर्ति बना कर, गंगाजल से स्नान करायें तथा यज्ञ विभूति लगा कर, कुछ भोग लगा दें और उनसे कार्य की सफलता हेतु कृपा करने की प्रार्थना करें। किसी धार्मिक ग्रंथ का एक अध्याय पढ़ कर, उस कुशा की मूर्ति को पवित्र नदी या सरोवर में प्रवाहित कर दें। सफलता अवश्य मिलेगी। सफलता के बाद किसी शुभ कार्य में दान दें।
-व्यापार, विवाह या किसी भी कार्य के करने में बार-बार असफलता मिल रही हो तो यह टोटका करें सरसों के तैल में सिके गेहूँ के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पूये, सात आक के पुष्प, सिंदूर, आटे से तैयार सरसों के तैल का रूई की बत्ती से जलता दीपक, पत्तल या अरण्डी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात्रि में किसी चौराहे पर रखें और कहें हे मेरे दुर्भाग्य तुझे यहीं छोड़े जा रहा हूँ कृपा करके मेरा पीछा ना करना।
वास्तु शास्त्र द्वारा घर में कुछ मामूली बदलाव कर समस्याओं को दूर कर आप घर एवं बाहर शांति का अनुभव कर सकते हैं।
- घर के मुख्यद्वार के दोनों ओर पत्थर या धातु का एक-एक हाथी रखने से सौभाग्य में वृद्धि होती है।- भवन में आपके नाम की प्लेट को बड़ी एवं चमकती हुई रखने से यश की वृद्धि होती है। - स्वर्गीय परिजनों के चित्र दक्षिणी दीवार पर लगाने से उनका आशीर्वाद मिलता रहता है। - विवाह योग्य कन्या को उत्तर-पश्चिम के कमरे में सुलाने से विवाह शीघ्र होता है।-किसी भी दुकान या कार्यालय के सामने वाले द्वार पर एक काले कपडे में फिटकरी बांधकर लटकाने से बरकत होती है। धंधा अच्छा चलता है।- दुकान के मुख्य द्वार के बीचों बीच नीबूं व हरी मिर्च लटकाने से नजर नहीं लगती है। - घर में स्वस्तिक का निशान बनाने से निगेटिव ऊर्जा का क्षय होता है- किसी भी भवन में प्रात: एवं सायंकाल को शंख बजाने से ऋणायनों में कमी होती है।- घर के उत्तर पूर्व में गंगा जल रखने से घर में सुख सम्पन्नता आती है। - पीपल की पूजा करने से श्री तथा यश की वृद्धि होती है। इसका स्पर्श मात्रा से शरीर में रोग प्रतिरोधक तत्वों की वृद्धि होती है। - घर में नित्य गोमूत्र का छिडकाव करने से सभी प्रकार के वास्तु दोषों से छुटकारा मिल जाता है। - मुख्य द्वार में आम, पीपल, अशोक के पत्तों का बंदनवार लगाने से वंशवृद्धि होती है।
- रूके हुए कार्यों की सिद्धि के लिए यह प्रयोग बहुत ही लाभदायक है। गणेश चतुर्थी को गणेश जी का ऐसा चित्र घर या दुकान पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दायीं ओर मुड़ी हुई हो। इसकी आराधना करें। इसके आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो एक लौंग तथा सुपारी को साथ ले कर जाएं, तो काम सिद्ध होगा। लौंग को चूसें तथा सुपारी को वापस ला कर गणेश जी के आगे रख दें तथा जाते हुए कहें श्री गणेश काटो कलेशं।
- सरकारी या निजी रोजगार क्षेत्र में परिश्रम के उपरांत भी सफलता नहीं मिल रही हो, तो नियमपूर्वक किये गये विष्णु यज्ञ की विभूति ले कर, अपने पितरों की क्वकुशां की मूर्ति बना कर, गंगाजल से स्नान करायें तथा यज्ञ विभूति लगा कर, कुछ भोग लगा दें और उनसे कार्य की सफलता हेतु कृपा करने की प्रार्थना करें। किसी धार्मिक ग्रंथ का एक अध्याय पढ़ कर, उस कुशा की मूर्ति को पवित्र नदी या सरोवर में प्रवाहित कर दें। सफलता अवश्य मिलेगी। सफलता के बाद किसी शुभ कार्य में दान दें।
-व्यापार, विवाह या किसी भी कार्य के करने में बार-बार असफलता मिल रही हो तो यह टोटका करें सरसों के तैल में सिके गेहूँ के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पूये, सात आक के पुष्प, सिंदूर, आटे से तैयार सरसों के तैल का रूई की बत्ती से जलता दीपक, पत्तल या अरण्डी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात्रि में किसी चौराहे पर रखें और कहें हे मेरे दुर्भाग्य तुझे यहीं छोड़े जा रहा हूँ कृपा करके मेरा पीछा ना करना।
वास्तु शास्त्र द्वारा घर में कुछ मामूली बदलाव कर समस्याओं को दूर कर आप घर एवं बाहर शांति का अनुभव कर सकते हैं।
- घर के मुख्यद्वार के दोनों ओर पत्थर या धातु का एक-एक हाथी रखने से सौभाग्य में वृद्धि होती है।- भवन में आपके नाम की प्लेट को बड़ी एवं चमकती हुई रखने से यश की वृद्धि होती है। - स्वर्गीय परिजनों के चित्र दक्षिणी दीवार पर लगाने से उनका आशीर्वाद मिलता रहता है। - विवाह योग्य कन्या को उत्तर-पश्चिम के कमरे में सुलाने से विवाह शीघ्र होता है।-किसी भी दुकान या कार्यालय के सामने वाले द्वार पर एक काले कपडे में फिटकरी बांधकर लटकाने से बरकत होती है। धंधा अच्छा चलता है।- दुकान के मुख्य द्वार के बीचों बीच नीबूं व हरी मिर्च लटकाने से नजर नहीं लगती है। - घर में स्वस्तिक का निशान बनाने से निगेटिव ऊर्जा का क्षय होता है- किसी भी भवन में प्रात: एवं सायंकाल को शंख बजाने से ऋणायनों में कमी होती है।- घर के उत्तर पूर्व में गंगा जल रखने से घर में सुख सम्पन्नता आती है। - पीपल की पूजा करने से श्री तथा यश की वृद्धि होती है। इसका स्पर्श मात्रा से शरीर में रोग प्रतिरोधक तत्वों की वृद्धि होती है। - घर में नित्य गोमूत्र का छिडकाव करने से सभी प्रकार के वास्तु दोषों से छुटकारा मिल जाता है। - मुख्य द्वार में आम, पीपल, अशोक के पत्तों का बंदनवार लगाने से वंशवृद्धि होती है।
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