शनि के कोप से बचने के लिये ही शास्त्रों में दोपहर में शनि पूजा कर शनैश्चर स्तवराज का पाठ बहुत असरदार माना गया है। विशेष तौर पर शनि दशा में यह शनि को अनुकूल बनाता है। अगर आप शनि दशा से गुजर रहे हैं या शनि दशा लगने वाली हो तो नीचे लिखी सरल विधि से शनि पूजा और मंत्र स्तुति करें - शनिवार के दिन दोपहर में शनि मंदिर में शनि प्रतिमा को गंध, तिल का तेल, काले तिल, उड़द, काला कपड़ा व तेल से बने व्यजंन चढ़ाकर नीचे लिखे शनैश्चर स्तवराज का पाठ करें -
ध्यात्वा गणपतिं राजा धर्मराजो युधिष्ठिरः।
धीरः शनैश्चरस्येमं चकार स्तवमुत्तमम।।
शिरो में भास्करिः पातु भालं छायासुतोवतु।
कोटराक्षो दृशौ पातु शिखिकण्ठनिभः श्रुती ।।
घ्राणं मे भीषणः पातु मुखं बलिमुखोवतु।
स्कन्धौ संवर्तकः पातु भुजौ मे भयदोवतु ।।
सौरिर्मे हृदयं पातु नाभिं शनैश्चरोवतु ।
ग्रहराजः कटिं पातु सर्वतो रविनन्दनः ।।
पादौ मन्दगतिः पातु कृष्णः पात्वखिलं वपुः ।
रक्षामेतां पठेन्नित्यं सौरेर्नामबलैर्युताम।।
सुखी पुत्री चिरायुश्च स भवेन्नात्र संशयः ।
सौरिः शनैश्चरः कृष्णो नीलोत्पलनिभः शन।।
शुष्कोदरो विशालाक्षो र्दुनिरीक्ष्यो विभीषणः ।
शिखिकण्ठनिभो नीलश्छायाहृदयनन्दनः ।।
कालदृष्टिः कोटराक्षः स्थूलरोमावलीमुखः ।
दीर्घो निर्मांसगात्रस्तु शुष्को घोरो भयानकः ।।
नीलांशुः क्रोधनो रौद्रो दीर्घश्मश्रुर्जटाधरः।
मन्दो मन्दगतिः खंजो तृप्तः संवर्तको यमः ।।
ग्रहराजः कराली च सूर्यपुत्रो रविः शशी ।
कुजो बुधो गुरूः काव्यो भानुजः सिंहिकासुत।।
केतुर्देवपतिर्बाहुः कृतान्तो नैऋतस्तथा।
शशी मरूत्कुबेरश्च ईशानः सुर आत्मभूः ।।
विष्णुर्हरो गणपतिः कुमारः काम ईश्वरः।
कर्ता हर्ता पालयिता राज्यभुग् राज्यदायकः ।।
छायासुतः श्यामलाङ्गो धनहर्ता धनप्रदः।
क्रूरकर्मविधाता च सर्वकर्मावरोधकः ।।
तुष्टो रूष्टः कामरूपः कामदो रविनन्दनः ।
ग्रहपीडाहरः शान्तो नक्षत्रेशो ग्रहेश्वरः ।।
स्थिरासनः स्थिरगतिर्महाकायो महाबलः ।
महाप्रभो महाकालः कालात्मा कालकालकः ।।
आदित्यभयदाता च मृत्युरादित्यनंदनः।
शतभिद्रुक्षदयिता त्रयोदशितिथिप्रियः ।।
तिथ्यात्मा तिथिगणनो नक्षत्रगणनायकः ।
योगराशिर्मुहूर्तात्मा कर्ता दिनपतिः प्रभुः ।।
शमीपुष्पप्रियः श्यामस्त्रैलोक्याभयदायकः ।
नीलवासाः क्रियासिन्धुर्नीलाञ्जनचयच्छविः ।।
सर्वरोगहरो देवः सिद्धो देवगणस्तुतः।
अष्टोत्तरशतं नाम्नां सौरेश्छायासुतस्य यः ।।
पठेन्नित्यं तस्य पीडा समस्ता नश्यति ध्रुवम् ।
कृत्वा पूजां पठेन्मर्त्यो भक्तिमान्यः स्तवं सदा ।।
विशेषतः शनिदिने पीडा तस्य विनश्यति।
जन्मलग्ने स्थितिर्वापि गोचरे क्रूरराशिगे ।।
दशासु च गते सौरे तदा स्तवमिमं पठेत् ।
पूजयेद्यः शनिं भक्त्या शमीपुष्पाक्षताम्बरैः ।।
विधाय लोहप्रतिमां नरो दुःखाद्विमुच्यते ।
वाधा यान्यग्रहाणां च यः पठेत्तस्य नश्यति ।।
भीतो भयाद्विमुच्येत बद्धो मुच्येत बन्धनात् ।
रोगी रोगाद्विमुच्येत नरः स्तवमिमं पठेत् ।।
पुत्रवान्धनवान् श्रीमान् जायते नात्र संशयः ।।
स्तवं निशम्य पार्थस्य प्रत्यक्षोभूच्छनैश्चरः ।
दत्त्वा राज्ञे वरः कामं शनिश्चान्तर्दधे तदा ।।
Saturday, June 18, 2011
Wednesday, June 1, 2011
बहुत ही पुण्य और संकटनाशक योग
बुधवार बुध ग्रह दोष शांति और श्री गणेश उपासना से विघ्रनाश और बुद्धि, समृद्धि पाने का बहुत ही शुभ दिन माना जाता है। बुध को शनि का मित्र ग्रह भी माना गया है।
शनि जयंती के साथ बुधवार बहुत ही पुण्य और संकटनाशक योग है। पुराणों के मुताबिक भगवान गणेश के जन्म के बाद जब शनिदेव की शापित नजर से श्री गणेश का सिर धड़ से अलग हो गया और वह गजमुख बने, तब माता पार्वती द्वारा दिये गए अंगरहित हो जाने के शाप से रक्षा के लिए शनिदेव ने भी गणेश की उपासना की।
शनि दोष से बचने के लिए भी भगवान श्री गणेश की स्तुति बहुत ही प्रभावी मानी गई है। खासतौर पर बुधवार और शनि जयंती की घड़ी में गणेश गायत्री के अलग-अलग मंत्रों और शनि का ध्यान शनि पीड़ा से रक्षा करेगा - सुबह और शाम दोनों वक्त स्नान कर नवग्रह मंदिर में या घर के देवालय में भगवान गणेश और शनि की पूजा करें। शनि प्रतिमा को तिल का तेल चढ़ाएं और शनि का नीचे लिखे मंत्र से ध्यान करें, गंध, अक्षत, फूल अर्पित करें। तिल के पकवान चढ़ावें।
नीलांबुज समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छाया मार्तण्ड सम्भूतं शनिमावाह्याम्यहम्।।
भगवान गणेश की प्रतिमा की भी लाल चंदन, अक्षत, दूर्वा, फूल, सिंदूर, मोदक का भोग चढ़ाकर पूजा करें। पूजा के बाद नीचे लिखें गणेश गायत्री मंत्रों में सभी या एक का जप कर शनि पीड़ा के साथ जीवन में विघ्रों से रक्षा की कामना करें -
- ॐ तत्कराटाय विद्महे। हस्तिमुखाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।।
- ॐ तत्पुरुषाय विद्महे। वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।।
- ॐ लम्बोदराय विद्महे। महोदराय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।।
- ॐ महोल्काय विद्महे। वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।।
अंत में शनि और गणेश की आरती करें।
शनि जयंती के साथ बुधवार बहुत ही पुण्य और संकटनाशक योग है। पुराणों के मुताबिक भगवान गणेश के जन्म के बाद जब शनिदेव की शापित नजर से श्री गणेश का सिर धड़ से अलग हो गया और वह गजमुख बने, तब माता पार्वती द्वारा दिये गए अंगरहित हो जाने के शाप से रक्षा के लिए शनिदेव ने भी गणेश की उपासना की।
शनि दोष से बचने के लिए भी भगवान श्री गणेश की स्तुति बहुत ही प्रभावी मानी गई है। खासतौर पर बुधवार और शनि जयंती की घड़ी में गणेश गायत्री के अलग-अलग मंत्रों और शनि का ध्यान शनि पीड़ा से रक्षा करेगा - सुबह और शाम दोनों वक्त स्नान कर नवग्रह मंदिर में या घर के देवालय में भगवान गणेश और शनि की पूजा करें। शनि प्रतिमा को तिल का तेल चढ़ाएं और शनि का नीचे लिखे मंत्र से ध्यान करें, गंध, अक्षत, फूल अर्पित करें। तिल के पकवान चढ़ावें।
नीलांबुज समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छाया मार्तण्ड सम्भूतं शनिमावाह्याम्यहम्।।
भगवान गणेश की प्रतिमा की भी लाल चंदन, अक्षत, दूर्वा, फूल, सिंदूर, मोदक का भोग चढ़ाकर पूजा करें। पूजा के बाद नीचे लिखें गणेश गायत्री मंत्रों में सभी या एक का जप कर शनि पीड़ा के साथ जीवन में विघ्रों से रक्षा की कामना करें -
- ॐ तत्कराटाय विद्महे। हस्तिमुखाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।।
- ॐ तत्पुरुषाय विद्महे। वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।।
- ॐ लम्बोदराय विद्महे। महोदराय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।।
- ॐ महोल्काय विद्महे। वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।।
अंत में शनि और गणेश की आरती करें।
Wednesday, May 25, 2011
बुधवार के साथ अष्टमी
श्री गणेश की उपासना के लिए ही बुधवार का विशेष महत्व है। वहीं बुधवार के साथ अष्टमी का योग बहुत ही शुभ बताया गया है। क्योंकि अष्टमी तिथि के स्वामी शिव हैं, जो भगवान गणेश के पिता हैं। इसलिए आज (25 मई) बुधवार-अष्टमी के इस शुभयोग में शिव उपासना सांसारिक इच्छाओं को शीघ्र पूरा करने वाली और गणेश का स्मरण इन कामनाओं की बाधाओं का नाश करने वाली होगा। अगर आप भी जीवन से जुड़ी कामनाओं को पूरा करने और उनमें आने वाले विघ्रों को दूर करना चाहते हैं तो शास्त्रों में बताए भगवान गणेश के इन विशेष नामों का स्मरण और शिव पूजा के नीचे बताए तरीके को अपनाकर बहुत ही शुभ फल पा सकते हैं . सुबह स्नान कर शिव या गणेश मंदिर में भगवान गणेश की पूजा में गंध, अक्षत, पीले फूल, पीले वस्त्र, दूर्वा, सिंदूर और मोदक का भोग अर्पित कर नीचे लिखे गणेश मंत्र का ध्यान करें -
गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक:।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम्।।
इसमें भगवान गणेश के बारह नामों का स्मरण है। संस्कृत भाषा पढऩे में असुविधा होने पर - गणपूज्य, वक्रतुण्ड, एकदंष्ट्र, त्रियम्बक (त्र्यम्बक), नीलग्रीव, लम्बोदर, विकट, विघ्रराज, धूम्रवर्ण, भालचन्द्र, विनायक और हस्तिमुख ये 12 गणेश नाम भी बोल कर भी पूजा की जा सकती है। इसी तरह शिवलिंग पर दूध मिला जल अर्पित कर शिव की पंचोपचार पूजा में गंध, अक्षत, फूल, बिल्वपत्र, आंकड़े के फूल अर्पित करें और पंचाक्षरी मंत्र 'नम: शिवाय' का ही जप कर लें। भगवान गणेश और शिव की पूजा के बाद गणेश और शिव आरती धूप और घी के दीप जलाकर करें। आरती के बाद क्षमाप्रार्थना करें. शिव-गणेश से जीवन की तमाम परेशानियों को दूर रखने या संकटमुक्ति की कामना करें। धार्मिक दृष्टि से बुधवार और अष्टमी के शुभ योग में शिव-गणेश की ऐसी पूजा, आरती और प्रार्थना संकटमुक्त जीवन देने वाली मानी गई है।
गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक:।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम्।।
इसमें भगवान गणेश के बारह नामों का स्मरण है। संस्कृत भाषा पढऩे में असुविधा होने पर - गणपूज्य, वक्रतुण्ड, एकदंष्ट्र, त्रियम्बक (त्र्यम्बक), नीलग्रीव, लम्बोदर, विकट, विघ्रराज, धूम्रवर्ण, भालचन्द्र, विनायक और हस्तिमुख ये 12 गणेश नाम भी बोल कर भी पूजा की जा सकती है। इसी तरह शिवलिंग पर दूध मिला जल अर्पित कर शिव की पंचोपचार पूजा में गंध, अक्षत, फूल, बिल्वपत्र, आंकड़े के फूल अर्पित करें और पंचाक्षरी मंत्र 'नम: शिवाय' का ही जप कर लें। भगवान गणेश और शिव की पूजा के बाद गणेश और शिव आरती धूप और घी के दीप जलाकर करें। आरती के बाद क्षमाप्रार्थना करें. शिव-गणेश से जीवन की तमाम परेशानियों को दूर रखने या संकटमुक्ति की कामना करें। धार्मिक दृष्टि से बुधवार और अष्टमी के शुभ योग में शिव-गणेश की ऐसी पूजा, आरती और प्रार्थना संकटमुक्त जीवन देने वाली मानी गई है।
Friday, May 20, 2011
लक्ष्मी स्त्रोत
धन और ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी की पूजा से जहां दरिद्रता का अंधेरा दूर होकर सुख समृद्धि का उजाला भरने वाली है। वहीं व्यावहारिक संदेश यह है कि जीवन में धन के साथ ज्ञान, विचार और बुद्धि बल भी जीवन से कलह, दु:ख और कष्टों को दूर करने के लिए अहम हैं। अगर आप भी जीवन से जुड़े किसी संताप, परेशानी या समस्याओं का सामना कर रहे हैं तो शाम के वक्त नियमित रूप से खासतौर पर शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी के इस स्त्रोत का पाठ जरूर करें - शाम को माता लक्ष्मी की सामान्य पूजा उपचारों गंध, अक्षत, फूल, फल, धूप और घी का दीप लगाने के बाद लक्ष्मी स्त्रोत का पाठ करें -
नमस्तेस्तु महामाये श्री पीठे सुरपूजिते।
शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते।।
नमस्ते गरुडारूढ़े कोलासुरभयंकरि।
सर्वपापहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।।
सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि।
सर्वदु:खहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।।
सिद्धिबुद्धिप्रदे देवी महालक्ष्मी भुक्ति-मुक्तिप्रदायिनी।
मन्त्रपूते सदादेवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।।
नमस्तेस्तु महामाये श्री पीठे सुरपूजिते।
शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते।।
नमस्ते गरुडारूढ़े कोलासुरभयंकरि।
सर्वपापहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।।
सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि।
सर्वदु:खहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।।
सिद्धिबुद्धिप्रदे देवी महालक्ष्मी भुक्ति-मुक्तिप्रदायिनी।
मन्त्रपूते सदादेवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।।
Tuesday, May 17, 2011
सफलता और सौभाग्य
श्रेष्ठ मुहूर्त देखकर उस दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्म से निवृत्त हो लें। अब स्नान कर साफ वस्त्र पहन लें और उसके ऊपर पीला वस्त्र भी अवश्य पहनें। घर के किसी शांत कमरे में उत्तर दिशा की ओर मुंह करके ऊन के आसन पर चावल बिखेरें। इन चावलों पर मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का सम्मिलित चित्र स्थापित करें। इसके बाद पंचामृत का तिलक करें और आरती उतारें। तीन हकीक और सात गोमती चक्र अर्पित करें। फूल चढ़ाएं और मावे का प्रसाद चढ़ाएं। धूप-दीप और अगरबत्ती दिखाएं। अब इस हकीक की माला से इस मंत्र का 1188 बार उच्चारण करें अर्थात 21 माला।
ऊँ श्रीं कृं क्षौं सिद्धये ऊँ
मंत्र जपते समय बीच में किसी से कोई बात न करें। अब मां लक्ष्म, मां सरस्वती और गणपति देव का स्मरण करें और प्रार्थना करें कि आपका भविष्य उज्जवल हो, आपको सफलता मिले और सौभाग्य की प्राप्ति हो। साधना समाप्ति के बाद पूजन सामग्री किसी लक्ष्मी मंदिर में चढ़ा दें। चित्र पूजाघर में स्थापित कर प्रसाद बांट दें।
ऊँ श्रीं कृं क्षौं सिद्धये ऊँ
मंत्र जपते समय बीच में किसी से कोई बात न करें। अब मां लक्ष्म, मां सरस्वती और गणपति देव का स्मरण करें और प्रार्थना करें कि आपका भविष्य उज्जवल हो, आपको सफलता मिले और सौभाग्य की प्राप्ति हो। साधना समाप्ति के बाद पूजन सामग्री किसी लक्ष्मी मंदिर में चढ़ा दें। चित्र पूजाघर में स्थापित कर प्रसाद बांट दें।
हनुमान भक्ति से मंगल दोष शांति
श्री हनुमान की उपासना। श्री हनुमान भी रुद्र यानी शिव के अवतार माने जाते हैं। मंगल भी शिव के ही अंश है। यही कारण है कि हनुमान की भक्ति मंगल पीड़ा को भी शांत करने में प्रभावी मानी गई है। इसलिए जाने श्री हनुमान भक्ति से मंगल दोष शांति के लिए कुछ विशेष हनुमान मंत्र, जो हनुमान की सामान्य पूजा के बाद बोलें -
- मंगलवार के दिन स्नान कर खासतौर पर लाल वस्त्र पहनकर श्री हनुमान की पूजा में सिंदूर, लाल चंदन, लाल अक्षत, लाल कलेवा, वस्त्र, लाल फूल चढ़ाकर लाल अनार का भोग लगाएं। पूजा के बाद मंगलदोष शांति की कामना के साथ श्री हनुमान के इन सरल मंत्रों का जप करें -
- ॐ रुद्रवीर्य समुद्भवाय नम: - ॐ शान्ताय नम: - ॐ तेजसे नम: - ॐ प्रसन्नात्मने नम: - ॐ शूराय नम:
हनुमान मंत्र जप के बाद श्री हनुमान और मंगल देव का ध्यान कर लाल चन्दन लगे लाल फूल और अक्षत लेकर श्री हनुमान के चरणोंं में अर्पित करें। श्री हनुमान की आरती करें और मंगल दोष से रक्षा की प्रार्थना करें।
- मंगलवार के दिन स्नान कर खासतौर पर लाल वस्त्र पहनकर श्री हनुमान की पूजा में सिंदूर, लाल चंदन, लाल अक्षत, लाल कलेवा, वस्त्र, लाल फूल चढ़ाकर लाल अनार का भोग लगाएं। पूजा के बाद मंगलदोष शांति की कामना के साथ श्री हनुमान के इन सरल मंत्रों का जप करें -
- ॐ रुद्रवीर्य समुद्भवाय नम: - ॐ शान्ताय नम: - ॐ तेजसे नम: - ॐ प्रसन्नात्मने नम: - ॐ शूराय नम:
हनुमान मंत्र जप के बाद श्री हनुमान और मंगल देव का ध्यान कर लाल चन्दन लगे लाल फूल और अक्षत लेकर श्री हनुमान के चरणोंं में अर्पित करें। श्री हनुमान की आरती करें और मंगल दोष से रक्षा की प्रार्थना करें।
Tuesday, May 10, 2011
केतु के अशुभ प्रभाव को कम करें
ज्योतिष शास्त्र में केतु को पाप ग्रह माना गया है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में कई संकट आते हैं। कुछ साधारण उपाय कर केतु के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है। इन टोटकों को करने से केतु से संबंधित आपकी हर समस्या स्वत: ही समाप्त हो जाएगी।
त्रयोदशी का व्रत रखे .भैरवजी की उपासना करें। केले के पत्ते पर चावल का भोग लगाएं। गाय के घी का दीपक प्रतिदिन शाम को जलाएं। हरा रुमाल सदैव अपने साथ में रखें। तिल के लड्डू सुहागिनों को खिलाएं और तिल का दान करें। कन्याओं को रविवार के दिन मीठा दही और हलवा खिलाएं। बरफी के चार टुकड़े बहते पानी में बहाएं। कृष्ण पक्ष में प्रतिदिन शाम को एक दोने में पके हुए चावल लेकर उस पर मीठा दही डाल लें और काले तिल के कुछ दानों को रख दान करें। यह दोना पीपल के नीचे रखकर केतु दोष शांति के लिए प्रार्थना करें। पीपल के वृक्ष के नीचे प्रतिदिन कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं। दो रंग का कंबल किसी गरीब को दान करें।
त्रयोदशी का व्रत रखे .भैरवजी की उपासना करें। केले के पत्ते पर चावल का भोग लगाएं। गाय के घी का दीपक प्रतिदिन शाम को जलाएं। हरा रुमाल सदैव अपने साथ में रखें। तिल के लड्डू सुहागिनों को खिलाएं और तिल का दान करें। कन्याओं को रविवार के दिन मीठा दही और हलवा खिलाएं। बरफी के चार टुकड़े बहते पानी में बहाएं। कृष्ण पक्ष में प्रतिदिन शाम को एक दोने में पके हुए चावल लेकर उस पर मीठा दही डाल लें और काले तिल के कुछ दानों को रख दान करें। यह दोना पीपल के नीचे रखकर केतु दोष शांति के लिए प्रार्थना करें। पीपल के वृक्ष के नीचे प्रतिदिन कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं। दो रंग का कंबल किसी गरीब को दान करें।
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