Thursday, February 3, 2011

कौन से क्षेत्र में करियर संवारें

युवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या करियर बनाने की होती है। युवाओं के सामने इतने विकल्प होते हैं कि वह यह समझ ही नहीं पाते कि कौन से क्षेत्र में अपना करियर संवारें। ऐसे में जन्मकुंडली देखकर यह जाना जा सकता है कि कौन सा क्षेत्र उसके करियर के लिए उपयुक्त है। जन्मकुंडली का नवम भाव त्रिकोण स्थान है, जिसके कारक देवगुरु बृहस्पति हैं। यह भाव शिक्षा में महत्वकांक्षा और उच्चशिक्षा को दर्शाता है।
गणित- गणित के कारक ग्रह बुध का संबंध यदि जातक के लग्न, लग्नेश अथवा लग्न नक्षत्र से होता है तो जातक गणित विषय में सफल होता है जैसे- बैंक, अकाउंट्स व सीए आदि।जीवविज्ञान- सूर्य का जलीय तत्व की राशि में स्थित होना, षष्ट और दशम भाव-भावेश के बीच संबंध, सूर्य और मंगल का संबंध आदि चिकित्सा क्षेत्र में पढ़ाई के कारक होते हैं। लग्न-लग्नेश और दशम-दशमेश का संबंध अश्विनी, मघा अथवा मूल नक्षत्र से हो तो चिकित्सा क्षेत्र में सफलता मिलती है।
कला- पंचम-पंचमेश और इस भाव के कारक गुरु का पीडि़त होना कला के क्षेत्र में पढ़ाई में बाधक होता है। इन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पढ़ाई पूरी करवाने में सक्षम होती है। वाणिज्य- कुंडली में लग्न-लग्नेश का संबंध बुध के साथ-साथ गुरु से भी हो तो जातक वाणिज्य विषय की पढ़ाई सफलतापूर्वक करता है। इंजीनियरिंग- जन्म, नवांश अथवा चंद्रलग्न से मंगल चतुर्थ स्थान में हो अथवा चतुर्थेश मंगल की राशि में स्थित हो तो जातक इंजीनियर की पढ़ाई करता है। साथ ही यदि मंगल की चतुर्थ भाव अथवा चतुर्थेश पर दृष्टि हो अथवा चतुर्थेश के साथ युति हो तो भी जातक इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाता है।

Wednesday, February 2, 2011

बुद्धि के देवता बुध ग्रह

बुध को बुद्धि का देवता माना जाता है। यदि कुंडली में बुध ग्रह अशुभ होता है तो व्यक्ति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहती। पढ़ाई, दिमाग से संबंधित कार्यों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बुध के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए ये उपाय करें: प्रति बुधवार बुध देवता के संबंधित विशेष अर्चना करें। रोज श्रीगणेश का पूजन करें। बुध विपक्ष में होने पर हरे रंग से दूरी बनाए रखें। अपने आसपास कोई भी हरे रंग की वस्तु ना रखे। पांच बुधवार तक पांच कन्याओं का हरे वस्त्र दान करें।
गरीबों को बुध का दान करें। उपहार आदि में बुध से संबंधित वस्तुएं ना लें। प्रति बुधवार गाय को हरी घास खिलाएं। बुध की वजह से अधिक परेशानी हो या त्वरित राहत के लिए सात मुंगे हरे कपड़े में बांध कर नदी में प्रवाहित करें। प्रति बुधवार हरि इलाइची नदी में बहाएं, इसके बाद एक इलाइची और तुलसी के पत्ते खाएं। बुधवार गरीबों को हरे मूंग का दान करें। प्रति बुधवार व्रत-उपवास करें। ज्योतिषी से सलाह लेकर बुध का रत्न पन्ना धारण करें।

जीवन पर ग्रहों का प्रभाव

हमारा नौ ग्रहों की स्थितियों के पर निर्भर करता है। कुंडली 12 भागों में विभक्त रहती है, इन 12 भागों में नौ ग्रहों की अलग-अलग स्थितियां रहती हैं। सभी ग्रहों के शुभ-अशुभ फल होते हैं। हमारी कुंडली में जो ग्रह अच्छी स्थिति में होता है वह हमें अच्छा और अशुभ स्थिति में बुरा फल देते हैं। सूर्य ग्रह हमें तेज, यश, मान-सम्मान प्रदान करता है। सूर्य शुभ होने पर हमें समाज में प्रसिद्धि मिलती है वहीं सूर्य के अशुभ होने पर अपमान जैसे विपरित प्रभाव होते हैं।

चंद्र: चंद्र का संबंध हमारा मन से बताया गया है। चंद्र अच्छी स्थिति में हो तो व्यक्ति शांत होता है लेकिन अशुभ चंद्र व्यक्ति को पागल तक बना सकता है।
मंगल: मंगल हमारे धैर्य और पराक्रम को नियंत्रित करता है। शुभ मंगल हो तो व्यक्ति कुशल प्रबंधक होता है।
बुध: बुध ग्रह हमारी बुद्धि और बोली को प्रभावित करता है। शुभ बुध होने पर हमारी बुद्धि शुद्ध और पवित्र होती है लेकिन अशुभ होने पर विपरित प्रभाव होते हैं।
गुरु: गुरु ग्रह हमारी धार्मिक भावनाओं को नियंत्रित करता है।
शुक्र: शुक्र से प्रभावित व्यक्ति कलाप्रेमी, सुंदर और ऐश्वर्य प्राप्त करने वाले होता है।
शनि: जिस व्यक्ति की कुंडली शुभ अवस्था में हो वह सभी सुखों को प्राप्त करने वाला, श्याम वर्ण, शक्तिशाली होता है। शनि अशुभ होने पर कई परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।
राहु: जिस व्यक्ति की कुंडली राहु बलशाली होता है वह कठोर स्वभाव वाला, प्रखर बुद्धि, श्याम वर्ण होता है। इसके अशुभ होने पर बड़ी-बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
केतु: केतु शुभ हो तो व्यक्ति को कठोर स्वभाव, गरीबों का हित करने वाला, श्याम वर्ण होता है।
यह सभी प्रभाव अन्य ग्रहों की युति और कुंडली में अलग-अलग भावों से बदल भी जाते हैं।

Tuesday, February 1, 2011

कालसर्प और राहू की स्थिति

कालसर्प दोष का नाम सुनते ही मन में भय उत्पन्न हो जाता है। आमतौर पर माना जाता है कि कालसर्प दोष जीवन में बहुत दु:ख देता है और असफलता का कारण भी होता है। लेकिन कई बार कुंडली में विशेष योगों के चलते यह शुभाशुभ फल भी प्रदान करता है।राहु को कालसर्प का मुख माना गया है। यदि राहु के साथ कोई भी ग्रह उसी राशि और नक्षत्र में शामिल है, तो वह ग्रह कालसर्प योग के मुख में स्थित माना जाता है।
यदि जातक की कुंडली में सूर्य कालसर्प के मुख में स्थित है अर्थात राहु के साथ स्थित हो तथा 1, 2, 3, 10 अथवा 12 वें स्थान में हो एवं शुभ राशि और शुभ प्रभाव में हो तो प्रतिष्ठा दिलवाता है। जातक का स्वास्थ्य उत्तम रहता है। वह राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में प्रसिद्धि प्राप्त करता है। यदि जातक की कुंडली में कालसर्प के मुख में चंद्रमा शुभ स्थिति और प्रभाव में हो तो जातक को परिपक्व और उच्च विचारधारा वाला बनाता है।यदि जातक की कुंडली में मंगल कालसर्प के मुख में स्थित हो तो इसकी शुभ एवं बली स्थिति जातक को पराक्रमी और साहसी तथा व्यवहार कुशल बनाती है। वह हमेशा कामयाब होता है।बुध यदि कालसर्प के मुख में स्थित हो तथा शुभ स्थिति और प्रभाव में हो तो ऐसे जातक को उच्च शिक्षा मिलती है तथा वह बहुत उन्नति भी करता है।राहु के साथ गुरु की युति गुरु-चांडाल योग बनाती है। ज्योतिष में इसे अशुभ माना जाता है। लेकिन अगर यह योग शुभ स्थिति और शुभ प्रभाव में हो तो जातक को अच्छी प्रगति मिलती है।कालसर्प के मुख में स्थित शुक्र शुभ स्थिति और प्रभाव में होने पर पूर्ण स्त्री सुख प्रदान करता है। दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है।
यदि कालसर्प के मुख में शनि शुभ स्थिति हो तो जातक को परिपक्व और तीक्ष्ण बुद्धि वाला होता है।

बड़े काम का गोमती चक्र

गोमती चक्र पत्थर गोमती नदी में मिलता है। विभिन्न तांत्रिक कार्यों तथा असाध्य रोगों में इसका प्रयोग होता है। इसका तांत्रिक उपयोग बहुत ही सरल होता है। किसी भी प्रकार की समस्या के निदान के लिए यह बहुत ही कारगर उपाय है।
1- यदि घर में भूत-प्रेतों का उपद्रव हो तो दो गोमती चक्र लेकर घर के मुखिया के ऊपर घुमाकर आग में डाल दें तो घर से भूत-प्रेत का उपद्रव समाप्त हो जाता है।
2- यदि घर में बीमारी हो या किसी का रोग शांत नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर उसे चांदी में पिरोकर रोगी के पलंग के पाये पर बांध दें। उसी दिन से रोगी को आराम मिलने लगता है।
3- प्रमोशन नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें और सच्चे ह्रदय से प्रार्थना करें। निश्चय ही प्रमोशन के रास्ते खुल जाएंगे।
4- व्यापार वृद्धि के लिए दो गोमती चक्र लेकर उसे बांधकर ऊपर चौखट पर लटका दें और ग्राहक उसके नीचे से निकले तो निश्चय ही व्यापार में वृद्धि होती है।
5- यदि इस गोमती चक्र को लाल सिंदूर के डिब्बी में घर में रखें तो घर में सुख-शांति बनी रहती है।

Sunday, January 30, 2011

त्वचा रोग और ग्रह

त्वचा रोग के लिए बुध ग्रह, शनि, राहु, मंगल के अशुभ होने पर तथा सूर्य, चंद्र के कमजोर होने पर त्वचा रोग होते हैं। कुण्डली में षष्ठम यानि छठां भाव त्वचा से संबंधित होता है। यदि कुंडली में सप्तम स्थान पर केतु भी त्वचा रोग का कारण बन सकता है। बुध यदि बलवान है तो यह रोग पूरा असर नहीं दिखाता, वहीं बुध के कमजोर रहने पर निश्चित ही त्वचा रोग परेशान कर सकते हैं।- चंद्र के कारण पानी अथवा मवाद से भरी फुंसी व मुंहासे होती है।- मंगल के कारण रक्त विकार वाले कील-मुंहासे होते हैं।- राहु के प्रभाव से दर्द देने वाले कील-मुंहासे होते हैं।
कील-मुंहासों : उपाय- यदि षष्ठम स्थान पर कोई अशुभ ग्रह है तो उसका उपचार कराएं।- सूर्य मंत्रों या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।- शनिवार के दिन कुत्ते को तेल चुपड़ी रोटी खिलाएं।- सरस्वती स्तोत्र का पाठ करें।- पारद शिवलिंग का पूजन करें।- प्रतिदिन सूर्य को जल चढ़ाएं और 7 परिक्रमा करें।
माना जाता है कि कील-मुंहासे खून की खराबी से होते हैं। साथ ही खान-पान की गड़बड़ी भी कील-मुंहासों को पैदा कर देती है। इस बात से परेशान होकर आप डॉक्टर के पास जाते हैं। दवाइयां आदि लेने के बाद भी यदि कील-मुंहासे ठीक नहीं हो रहे हैं तो हो सकता है किसी ग्रह दोष की वजह से आपको इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

Thursday, January 27, 2011

सरस्वती का ध्यान देता है ज्ञान

आदिशक्ति के तीन रूपों महादुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती की उपासना का विशेष विधान है। इनमें माता सरस्वती को विद्या, बुद्धि, ज्ञान, संगीत और कला की देवी माना जाता है। व्यावहारिक रूप से विद्या और ज्ञान चरित्र और व्यक्तित्व विकास के लिए अहम बताया गया है। विद्या से विनम्रता, विनम्रता से पात्रता, पात्रता से धन और धन से सुख मिलता है। सार यही है कि माता सरस्वती का ध्यान, स्मरण या पूजा मानसिक रूप से सेहतमंद, मजबूत और दृढ बनाती है।शुक्रवार का दिन देवी पूजा का विशेष दिन होता है। इस दिन देवी के किसी भी रूप की पूजा बहुत शुभ मानी जाती है। इसलिए इस दिन सफलता के लिए बुद्धि और विद्या की कामना से सरस्वती पूजा प्रभावी होती है। जानते हैं इस दिन के लिए सरस्वती की सामान्य पूजा विधि और विशेष प्रार्थना-

- सुबह स्नान कर पवित्र आचरण, वाणी के संकल्प के साथ सरस्वती की पूजा करें।- पूजा में गंध, अक्षत के साथ खासतौर पर सफेद और पीले फूल, सफेद चंदन, वस्त्र देवी सरस्वती को चढ़ाएं।- प्रसाद में खीर, दूध, दही, मक्खन, सफेद तिल के लड्डू, घी, नारियल, शक्कर व मौसमी फल चढ़ाएं।- इसके बाद माता सरस्वती की इस स्तुति से बुद्धि और कामयाबी की कामना कर घी के दीप जलाकर माता सरस्वती की आरती करें -

या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ।।1।।
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।
हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।2।।