पंचमुखी हनुमान के स्वरुप
श्री हनुमान रूद्र के अवतार माने जाते हैं। आशुतोष यानि भगवान शिव का अवतार होने से उनके समान ही श्री हनुमान थोड़ी ही भक्ति से जल्दी ही हर कलह, दु:ख व पीड़ा को दूर कर मनोवांछित फल देने वाले माने जाते हैं। श्री हनुमान चरित्र गुण, शील, शक्ति, बुद्धि कर्म, समर्पण, भक्ति, निष्ठा, कर्तव्य जैसे आदर्शों से भरा है। इन गुणों के कारण ही भक्तों के ह्रदय में उनके प्रति गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी है, जो श्री हनुमान को सबसे अधिक लोकप्रिय देवता बनाती है।
श्री हनुमान के अनेक रूपों में साधना की जाती है। लोक परंपराओं में बाल हनुमान, भक्त हनुमान, वीर हनुमान, दास हनुमान, योगी हनुमान आदि प्रसिद्ध है। किंतु शास्त्रों में श्री हनुमान के एक चमत्कारिक रूप और चरित्र के बारे में लिखा गया है। वह है पंचमुखी हनुमान।
धर्मग्रंथों में अनेक देवी-देवता एक से अधिक मुख वाले बताए गए हैं। किंतु पांच मुख वाले हनुमान की भक्ति न केवल लौकिक मान्यताओं में बल्कि धार्मिक और तंत्र शास्त्रों में भी बहुत ही चमत्कारिक फलदायी मानी गई है। जानते हैं पंचमुखी हनुमान के स्वरुप और उनसे मिलने वाले शुभ फलों को -
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार पांच मुंह वाले दैत्य ने तप कर ब्रह्मदेव से यह वर पा लिया कि उसे अपने जैसे ही रूप वाले से मृत्यु प्राप्त हो। उसने जगत को भयंकर पीड़ा पहुंचाना शुरु किया। तब देवताओं की विनती पर श्री हनुमान से पांच मुखों वाले रूप में अवतार लेकर उस दैत्य का अंत कर दिया।
श्री हनुमान के पांच मुख पांच दिशाओं में हैं। हर रूप एक मुख वाला, त्रिनेत्रधारी यानि तीन आंखों और दो भुजाओं वाला है। यह पांच मुख नरसिंह, गरुड, अश्व, वानर और वराह रूप है।
पंचमुखी हनुमान का पूर्व दिशा में वानर मुख है, जो बहुत तेजस्वी है। जिसकी उपासना से विरोधी या दुश्मनों को हार मिलती है।
पंचमुखी हनुमान का पश्चिमी मुख गरूड का है, जिसके दर्शन और भक्ति संकट और बाधाओं का नाश करती है।
पंचमुखी हनुमान का उत्तर दिशा का मुख वराह रूप होता है, जिसकी सेवा-साधना अपार धन, दौलत, ऐश्वर्य, यश, लंबी आयु, स्वास्थ्य देती है।
पंचमुखी हनुमान का दक्षिण दिशा का मुख भगवान नृसिंह का है। इस रूप की भक्ति से जिंदग़ी से हर चिंता, परेशानी और डर दूर हो जाता है। पंचमुखी हनुमान का पांचवा मुख आकाश की ओर दृष्टि वाला होता है। यह रूप अश्व यानि घोड़े के समान होता है। श्री हनुमान का यह करुणामय रूप होता है, जो हर मुसीबत में रक्षा करने वाला माना जाता है।
पंचमुख हनुमान की साधना से जाने-अनजाने हुए सभी बुरे कर्म और विचारों के दोषों से छुटकारा मिलता है। वही धार्मिक रूप से ब्रह्मा, विष्णु और महेश त्रिदेवों की कृपा भी प्राप्त होती है। इस तरह श्री हनुमान का यह अद्भुत रूप शारीरिक, मानसिक, वैचारिक और आध्यात्मिक आनंद और सुख देने वाला माना गया है।
श्री हनुमान बल, बुद्धि और ज्ञान देने वाले देवता माने जाते हैं। श्री हनुमान की भक्ति और दर्शन कर्तव्य, समर्पण, ईश्वरीय प्रेम, स्नेह, परोपकार, वफादारी और पुरुषार्थ के लिए प्रेरित करते हैं। उनके विराट और पावन चरित्र के कारण ही उन्हें शास्त्रों में सकलगुणनिधान शब्द से पुकारा गया है।गोस्वामी तुलसीदास ने अपनी रचना हनुमान चालीसा में श्री हनुमान को माता सीता की कृपा से आठ सिद्धियों और नवनिधि प्राप्त करने और उसको भक्तों को देने का बल प्राप्त होने के बारे में लिखा है। यही कारण है कि हनुमान की भक्ति भक्त की सभी बुराईयों और दोषों को दूर कर गुण और बल देने वाली मानी गई है।
जहां गुण और गुणी व्यक्ति होते हैं, वहां संकट भी दूर रहते हैं। ऐसा व्यक्ति व्यावहारिक रूप से हनुमान की तरह ही संकटमोचक माना जाता है। इसलिए जानते हैं कि आखिर माता सीता की कृपा से श्री हनुमान ने किन नौ निधि को पाया, जो हनुमान उपासना से भक्तों को भी मिलती है। यह निधियाँ वास्तव में शक्तियों का ही रूप है।
पद्म निधि- इससे परिवार में सुख-समृद्धि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को प्राप्त होती रहती है।
महापद्म निधि - इसके असर से खुशहाली सात पीढियो तक बनी रहती है।
नील निधि - यह सफल कारोबार बनाती है।
मुकुंद निधि - यह भौतिक सुखों को देती है।
नन्द निधि- इसके प्रभाव से लम्बी उम्र और कामयाबी मिलती है।
मकर निधि -यह निधि शस्त्र और युद्धकला में दक्ष बनाती है।
कच्छप निधि-इस निधि के प्रभाव से दौलत और संपत्ति बनी रहती है।
शंख निधि - इससे व्यक्ति अपार धनलाभ पाता है।
खर्व निधि -इससे व्यक्ति को विरोधियों और कठिन समय पर विजय पाने की ताकत और दक्षता मिलती है।
श्री हनुमान शिव के अवतार माने गए हैं। शास्त्रों के मुताबिक श्री हनुमान सर्वगुण, सिद्धि और बल के अधिपति देवता हैं। यही कारण है कि वह संकटमोचक कहलाते हैं। हर हिन्दू धर्मावलंबी विपत्तियों से रक्षा के लिए श्री हनुमान का स्मरण और उपासना जरूर करता है।
श्री हनुमान की भक्ति और प्रसन्नता के लिए सबसे लोकप्रिय स्तुति गोस्वामी तुलसीदास द्वारा बनाई गई श्री हनुमान चालीसा है। इसी चालीसा में एक चौपाई आती है। जिसमें श्री हनुमान को आठ सिद्धियों को स्वामी बताया गया है।
यह चौपाई है -
अष्टसिद्धि नव निधि के दाता।
अस बर दीन्ह जानकी माता।।
अक्सर हर हनुमान भक्त चालीसा पाठ के समय इस चौपाई का भी आस्था से पाठ करता है। लेकिन इसमें बताई गई अष्टसिद्धियों के बारे में बहुत कम ही श्रद्धालु जानकारी रखते हैं। इस चौपाई के अनुसार यह अष्टसिद्धि माता सीता के आशीर्वाद से श्री हनुमान को प्राप्त हुई और साथ ही उनको इन सिद्धियों को अपने भक्तों को देने का भी बल प्राप्त हुआ। जानते हैं इन आठ सिद्धियों के नाम और सरल अर्थ -
अणिमा - इससे बहुत ही छोटा रूप बनाया जा सकता है।
लघिमा - इस सिद्धि से छोटा और हल्का बना जा सकता है।
महिमा - बड़ा रूप लेकर कठिन और दुष्कर कार्यों को आसानी से पूरा करने की सिद्धि।
गरिमा - शरीर का वजन बढ़ा लेने की सिद्धि। अध्यात्म की भाषा में अहंकारमुक्त होने का बल।
प्राप्ति - इच्छाशक्ति से मनोवांछित फल प्राप्त करने की सिद्धि।
प्राकाम्य - कामनाओं की पूर्ति और लक्ष्य पाने की दक्षता।
वशित्व - वश में करने की सिद्धि।
ईशित्व - ईष्टसिद्धि और ऐश्वर्य सिद्धि।
Sunday, December 19, 2010
Saturday, December 18, 2010
परेशानियों से बचाता है गोमती चक्र
गोमती चक्र सीप जैसे होते हैं। ये भी सीप के समान समुद्र में मिलती है। इनके आधार पर गोल घुमावदार आकृति बनी होती हैं ,यदि आपके घर में एक के बाद एक परेशानियां आ रही हो। व्यक्ति एक के बाद एक नई समस्याओं में उलझता जा रहा हो उसकी परेशानियों के निवारण के लिए है। गोमती चक्र हो किसी भी अमावस्या की रात्रि में या ग्रहण कल में सिद्ध करना चाहिए। एक बार सिद्ध होने पर गोमती चक्र तिन वर्षों तक प्रभावशाली रहता है।
- यदि घर में भूत-प्रेतों का उपद्रव हो तो दो गोमती चक्र लेकर घर के मुखिया के ऊपर घुमाकर आग में डाल दें तो घर से भूत -प्रेत का उपद्रव समाप्त हो जाता है।-घर में बीमारी हो या किसी का रोग शांत नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर उसे चांदी हो तो एक गोमती चक्र लेकरउसे चांदी में पिरोकर रोगी के पलंग के पायै पर बांध दें तो उसी दिन से रोगी का रोग समाप्त होने लगती है।- प्रमोशन नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें।- यदि गोमती चक्र को लाल सिंदूर की डिब्बी में घर में रखें तो घर में सुख शांति बनी रहती है।- पति-पत्नी मे मतभेद हो तो तीन गोमती चक्र लेकर उसे घर के दक्षिण दिशा में दोनों पर से घुमाकर फेंक दें।- यदि बार - बार गर्भ गिर रहा हो तो दो गोमती चक्र लाल कपड़े में बांधकर कमर में बांध दें तो गर्भ गिरना बंद हो जाता है।- कचहरी जाते समय घर के बाहर गोमती चक्र रखकर उस पर दाहिना पांव रखकर जावे तो उस दिन कोर्ट कचहरी में सफलता प्राप्त करता है।
- यदि घर में भूत-प्रेतों का उपद्रव हो तो दो गोमती चक्र लेकर घर के मुखिया के ऊपर घुमाकर आग में डाल दें तो घर से भूत -प्रेत का उपद्रव समाप्त हो जाता है।-घर में बीमारी हो या किसी का रोग शांत नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर उसे चांदी हो तो एक गोमती चक्र लेकरउसे चांदी में पिरोकर रोगी के पलंग के पायै पर बांध दें तो उसी दिन से रोगी का रोग समाप्त होने लगती है।- प्रमोशन नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें।- यदि गोमती चक्र को लाल सिंदूर की डिब्बी में घर में रखें तो घर में सुख शांति बनी रहती है।- पति-पत्नी मे मतभेद हो तो तीन गोमती चक्र लेकर उसे घर के दक्षिण दिशा में दोनों पर से घुमाकर फेंक दें।- यदि बार - बार गर्भ गिर रहा हो तो दो गोमती चक्र लाल कपड़े में बांधकर कमर में बांध दें तो गर्भ गिरना बंद हो जाता है।- कचहरी जाते समय घर के बाहर गोमती चक्र रखकर उस पर दाहिना पांव रखकर जावे तो उस दिन कोर्ट कचहरी में सफलता प्राप्त करता है।
Friday, December 17, 2010
राहु शुभ या अशुभ
किसी भी ग्रह के शुभ या अशुभ होने का निर्धारण कुंडली देखकर ही किया जाता है। राहु और केतु जिन्हे पाप ग्रह माना गया है। यदि वे कुंडली में दोष में हो तो जिन्दगी में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। राहु का शुभ या अशुभ होने का निर्धारण जन्मपत्रिका के आधार पर किया जाता है, लेकिन जिनकी जन्मपत्रिका ही नहीं बनी होती है। यदि बनी हुई भी है तो कभी किसी ज्योतिष को दिखाई नहीं है।ऐसी स्थिति में नीचे बताए गए लक्षणों को देखकर यह जानना चाहिए कि राहु अशुभ है या नहीं।
- यदि मानसिक स्थिति अच्छी नहीं है मानसिक भय हमेशा महसूस होता हो।- सांप, बिच्छु आदि जहरीले जानवर बार-बार काटते हों या इनके कारण कई बार खतरे में पड़ चुके हों।- बिना किसी बीमारी के हाथों के नाखून खराब हो जाएं या झड़ जाएं।- अचानक ऐसा लगे कि खराब समय आ गया है और एक के बाद एक कई सारी परेशानियां आपके सामने आ जाएं। जातक का भूरे रंग का कुत्ता खो जाए या मर जाए।- ऊंचाई वाले स्थान से आपको डर लगता हो या आप ऊंचे स्थान से एक दो बार गिर चुके हों।- बुखार अधिक होता हो और लम्बे समय तक चलता हो।-विवाह के पश्चात ससुराल में धनहानि हो या ससुराल से कोई आर्थिक लाभ नहीं हो।- हाथ पैरों में अक्सर सुजन रहती हो।
जन्म कुंडली राहु-केतु को छाया ग्रह माना जाता है परंतु फिर भी यह दोनों ग्रह व्यक्ति की जीवन दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। राहु की महादशा में गरीब भी किसी राजा के समान सुख प्राप्त करने लगता है और राहु विपरित होने पर रातोरात एक राजा भी रोड पर आ जाता है। यदि आपकी कुंडली में राहु अशुभ है और इसकी वजह से आपके सारे काम बिगड़ जाते हैं तो यह उपाय करें:
- प्रति सोमवार भगवान शिव का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक अवश्य करें।- लोहे के बर्तन में खाना खाएं।- गरीबों को कंबल, खाना, अनाज आदि उनके जरूरत की वस्तुएं दान करें।- राहु से संबंधी वस्तुएं दान में स्वीकार ना करें।- सोमवार या शनिवार का उपवास रखें।- शिवलिंग की नित्य नियम से पूजा करें, बिल्व पत्र, धतुरा आदि शिव को प्रिय वस्तुएं अर्पित करें।- राहु को काला रंग अतिप्रिय है, काले रंग से वह और अधिक सक्रीय हो जाता है। अत: अपने आसपास से काले रंग को पूर्णतया दूर कर दें।- मछलियों को आटे की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर खिलाएं।- अपने विश्वासपात्र ज्योतिषी से परामर्श लें।
- यदि मानसिक स्थिति अच्छी नहीं है मानसिक भय हमेशा महसूस होता हो।- सांप, बिच्छु आदि जहरीले जानवर बार-बार काटते हों या इनके कारण कई बार खतरे में पड़ चुके हों।- बिना किसी बीमारी के हाथों के नाखून खराब हो जाएं या झड़ जाएं।- अचानक ऐसा लगे कि खराब समय आ गया है और एक के बाद एक कई सारी परेशानियां आपके सामने आ जाएं। जातक का भूरे रंग का कुत्ता खो जाए या मर जाए।- ऊंचाई वाले स्थान से आपको डर लगता हो या आप ऊंचे स्थान से एक दो बार गिर चुके हों।- बुखार अधिक होता हो और लम्बे समय तक चलता हो।-विवाह के पश्चात ससुराल में धनहानि हो या ससुराल से कोई आर्थिक लाभ नहीं हो।- हाथ पैरों में अक्सर सुजन रहती हो।
जन्म कुंडली राहु-केतु को छाया ग्रह माना जाता है परंतु फिर भी यह दोनों ग्रह व्यक्ति की जीवन दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। राहु की महादशा में गरीब भी किसी राजा के समान सुख प्राप्त करने लगता है और राहु विपरित होने पर रातोरात एक राजा भी रोड पर आ जाता है। यदि आपकी कुंडली में राहु अशुभ है और इसकी वजह से आपके सारे काम बिगड़ जाते हैं तो यह उपाय करें:
- प्रति सोमवार भगवान शिव का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक अवश्य करें।- लोहे के बर्तन में खाना खाएं।- गरीबों को कंबल, खाना, अनाज आदि उनके जरूरत की वस्तुएं दान करें।- राहु से संबंधी वस्तुएं दान में स्वीकार ना करें।- सोमवार या शनिवार का उपवास रखें।- शिवलिंग की नित्य नियम से पूजा करें, बिल्व पत्र, धतुरा आदि शिव को प्रिय वस्तुएं अर्पित करें।- राहु को काला रंग अतिप्रिय है, काले रंग से वह और अधिक सक्रीय हो जाता है। अत: अपने आसपास से काले रंग को पूर्णतया दूर कर दें।- मछलियों को आटे की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर खिलाएं।- अपने विश्वासपात्र ज्योतिषी से परामर्श लें।
Wednesday, December 15, 2010
शिव के पांचवे अवतार भैरव
भगवान शिव के पांचवे अवतार भैरव माने गए हैं। शिव पुराण के अनुसार अष्टमी तिथि को भगवान शिव ने भैरव रुप में अवतार लिया। भैरव चरित्र पराक्रम और साहस का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं में भैरव को काशी का कोतवाल यानि रक्षा करने वाले देवता कहा गया है। इस तरह भैरव की उपासना से जीवन में शत्रु, चिंता, कष्ट, परेशानियों से जुड़े हर भय का दमन हो जाता है। इसके साथ ही भैरव पूजा धन, संतान और निरोगी शरीर देकर व्यक्ति और कुटुंब को खुशहाल और कलह मुक्त करती है। यही कारण है कि लोक जीवन में भैरव अनेक रुप और नामों से पूजनीय है।
भगवान शिव तंत्र के देवता है। उनका ही अवतार होने से भैरव की भी तंत्र साधना बहुत असरदार मानी गई है। वहीं ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक भैरव साधना से मंगल दोष से होने वाली खून की बीमारियों या घटनाओं से रक्षा होती है।
यही कारण है कि मंगलवार और अष्टमी तिथि के शुभ योग में भैरव पूजा अति शुभ फल देने वाली मानी गई है। गृहस्थ जीवन के लिए रुद्रावतार भैरव के सात्विक रूप की उपासना का महत्व बताया गया है। इसलिए इस दिन भैरव की सामान्य पूजा के साथ नीचे लिखे भैरव मंत्र को भय और कष्ट दूर करने लिए अकाट्य मंत्र माना गया है -
- मंगलवार या अष्टमी के दिन दोपहर या शाम को पवित्र होकर भैरव की प्रतिमा की सामान्य पंचोपचार पूजा करें। जिसमें सिंदूर, कुंकूम, अक्षत, लाल फूल, गुड़-चने का भोग लगाकर पूजा करें। - पूजा के बाद भैरव गायत्री के प्रभावी मंत्र का जप करें। कम से कम एक माला कुश या ऊन के आसन पर बैठकर करें। मंत्र है -
ऊँ शिवगणाय विद्महे।
गौरीसुताय धीमहि।
तन्नो भैरव प्रचोदयात।
- यह मंत्र भी संभव न हो तो मन ही मन ऊँ भैरवाय नम: मंत्र का जप मंगलवार और अष्टमी पर भय व विघ्रनाशक माना जाता है।- जप के बाद गुग्गल धूप और घी का दीप जलाकर भैरव आरती करें।
भगवान शिव तंत्र के देवता है। उनका ही अवतार होने से भैरव की भी तंत्र साधना बहुत असरदार मानी गई है। वहीं ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक भैरव साधना से मंगल दोष से होने वाली खून की बीमारियों या घटनाओं से रक्षा होती है।
यही कारण है कि मंगलवार और अष्टमी तिथि के शुभ योग में भैरव पूजा अति शुभ फल देने वाली मानी गई है। गृहस्थ जीवन के लिए रुद्रावतार भैरव के सात्विक रूप की उपासना का महत्व बताया गया है। इसलिए इस दिन भैरव की सामान्य पूजा के साथ नीचे लिखे भैरव मंत्र को भय और कष्ट दूर करने लिए अकाट्य मंत्र माना गया है -
- मंगलवार या अष्टमी के दिन दोपहर या शाम को पवित्र होकर भैरव की प्रतिमा की सामान्य पंचोपचार पूजा करें। जिसमें सिंदूर, कुंकूम, अक्षत, लाल फूल, गुड़-चने का भोग लगाकर पूजा करें। - पूजा के बाद भैरव गायत्री के प्रभावी मंत्र का जप करें। कम से कम एक माला कुश या ऊन के आसन पर बैठकर करें। मंत्र है -
ऊँ शिवगणाय विद्महे।
गौरीसुताय धीमहि।
तन्नो भैरव प्रचोदयात।
- यह मंत्र भी संभव न हो तो मन ही मन ऊँ भैरवाय नम: मंत्र का जप मंगलवार और अष्टमी पर भय व विघ्रनाशक माना जाता है।- जप के बाद गुग्गल धूप और घी का दीप जलाकर भैरव आरती करें।
Saturday, December 11, 2010
शुक्र देव को प्रसन्न करें
ज्योतिष में शुक्र को स्त्री ग्रह माना गया है। शुक्र ग्रह से प्रभावित व्यक्ति सौम्य एवं अत्यंत सुंदर होते है। यदि किसी की कुंडली में शुक्र शुभ प्रभाव देता है तो वह जातक आकर्षक, सुंदर और मनमोहक होता है। शुक्र के विशेष प्रभाव से वह जीवनभर सुखी रहता है।
शुक्र को पति-पत्नि, प्रेम संबंध, ऐश्वर्य, आनंद आदि का भी कारक ग्रह माना गया है। यदि आपकी कुंडली में शुक्र की स्थिति अच्छी है तो आपका पूरा जीवन भोग,आनंद और ऐश्वर्य के साथ बितता है। साथ ही दाम्पत्य जीवन सुख और प्रेम से भर जाता है।
शुक्र अपने प्रभाव से व्यक्ति को मकान और वाहन आदि का भी सुख देता है। यदि आप चाहते है कि आपका भी दाम्पत्य जीवन प्रेम, आंनद और सुख से बीते तो, शुक्र के शुभफल देने वाले उपाय करें...
शुक्र देव को प्रसन्न करने के उपाय-
- काली चींटियों को चीनी खिलानी चाहिए।- शुक्रवार के दिन सफेद गाय को आटा खिलाना चाहिए।- किसी काने व्यक्ति को सफेद वस्त्र एवं सफेद मिष्ठान्न का दान करना चाहिए।- 10 वर्ष से कम आयु की कन्या को भोजन कराए और चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें।- अपने घर में सफेद पत्थर लगवाना चाहिए।- किसी कन्या के विवाह में कन्यादान का अवसर मिले तो अवश्य स्वीकारना चाहिए।- शुक्रवार के दिन गाय के दुध से स्नान करना चाहिए।- किसी मन्दिर में गाय का घी दान दें।- जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं।
शुक्र के शुभ प्रभाव के लिए किए जा रहे उपाय शुक्रवार के दिन करे तो ज्यादा प्रभावशाली होते है या जिस दिन शुक्र का कोई नक्षत्र (भरणी, पूर्वा-फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा) आ रहा हो उस दिन करें।
शुक्र को पति-पत्नि, प्रेम संबंध, ऐश्वर्य, आनंद आदि का भी कारक ग्रह माना गया है। यदि आपकी कुंडली में शुक्र की स्थिति अच्छी है तो आपका पूरा जीवन भोग,आनंद और ऐश्वर्य के साथ बितता है। साथ ही दाम्पत्य जीवन सुख और प्रेम से भर जाता है।
शुक्र अपने प्रभाव से व्यक्ति को मकान और वाहन आदि का भी सुख देता है। यदि आप चाहते है कि आपका भी दाम्पत्य जीवन प्रेम, आंनद और सुख से बीते तो, शुक्र के शुभफल देने वाले उपाय करें...
शुक्र देव को प्रसन्न करने के उपाय-
- काली चींटियों को चीनी खिलानी चाहिए।- शुक्रवार के दिन सफेद गाय को आटा खिलाना चाहिए।- किसी काने व्यक्ति को सफेद वस्त्र एवं सफेद मिष्ठान्न का दान करना चाहिए।- 10 वर्ष से कम आयु की कन्या को भोजन कराए और चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें।- अपने घर में सफेद पत्थर लगवाना चाहिए।- किसी कन्या के विवाह में कन्यादान का अवसर मिले तो अवश्य स्वीकारना चाहिए।- शुक्रवार के दिन गाय के दुध से स्नान करना चाहिए।- किसी मन्दिर में गाय का घी दान दें।- जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं।
शुक्र के शुभ प्रभाव के लिए किए जा रहे उपाय शुक्रवार के दिन करे तो ज्यादा प्रभावशाली होते है या जिस दिन शुक्र का कोई नक्षत्र (भरणी, पूर्वा-फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा) आ रहा हो उस दिन करें।
Saturday, December 4, 2010
किस ग्रह के लिए कौन सी जड़?
- यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य अशुभ प्रभाव दे रहा हो और सूर्य के लिए माणिक रत्न एफोर्ड नहीं कर सकते हैं तो, विकल्प के रूप में सूर्य को बल देने के लिए बेलपत्र की जड़ लाल या गुलाबी धागे में रविवार को धारण करें।
- चंद्र के शुभ प्रभाव के लिए सोमवार को सफेद वस्त्र में खिरनी की जड़ सफेद धागे के साथ धारण करें।
- मंगल को बलवान बनाने के लिए अनंत मूल या खेर की जड़ को लाल वस्त्र के साथ लाल धागे में मंगलवार को धारण करें।
- बुधवार के दिन हरे वस्त्र के साथ विधारा (आंधीझाड़ा) की जड़ को हरे धागे में पहनने से बुध देव प्रसन्न होते है।
- गुरु को बल देने के लिए केले की जड़ गुरुवार को पीले धागे में धारण करें।
- गुलर की जड़ को सफेद वस्त्र में लपेट कर शुक्रवार को सफेद धागे के साथ गले में धारण करने से शुक्र देव प्रसन्न होते हैं।
-शनि देव को प्रसन्न करने के लिए शमी पेड़ की जड़ को शनिवार के दिन नीले वस्त्र में धारण करना चाहिए।
-राहु को बल देने के लिए सफेद चंदन का टुकड़ा नीले धागे में बुधवार के दिन धारण करें।
- केतु के शुभ प्रभाव के लिए अश्वगंधा की जड़ नीले धागे में गुरुवार के दिन धारण करें।
- चंद्र के शुभ प्रभाव के लिए सोमवार को सफेद वस्त्र में खिरनी की जड़ सफेद धागे के साथ धारण करें।
- मंगल को बलवान बनाने के लिए अनंत मूल या खेर की जड़ को लाल वस्त्र के साथ लाल धागे में मंगलवार को धारण करें।
- बुधवार के दिन हरे वस्त्र के साथ विधारा (आंधीझाड़ा) की जड़ को हरे धागे में पहनने से बुध देव प्रसन्न होते है।
- गुरु को बल देने के लिए केले की जड़ गुरुवार को पीले धागे में धारण करें।
- गुलर की जड़ को सफेद वस्त्र में लपेट कर शुक्रवार को सफेद धागे के साथ गले में धारण करने से शुक्र देव प्रसन्न होते हैं।
-शनि देव को प्रसन्न करने के लिए शमी पेड़ की जड़ को शनिवार के दिन नीले वस्त्र में धारण करना चाहिए।
-राहु को बल देने के लिए सफेद चंदन का टुकड़ा नीले धागे में बुधवार के दिन धारण करें।
- केतु के शुभ प्रभाव के लिए अश्वगंधा की जड़ नीले धागे में गुरुवार के दिन धारण करें।
Thursday, December 2, 2010
पुत्र प्राप्ति की कामना
रामचरित मानस का पाठ भगवान श्रीराम के साथ-साथ अनेक देव शक्तियों की उपासना और साधना है। इसलिए इसकी हर चौपाई बहुत ही शुभ और मंगलकारी मानी गई है। धार्मिक महत्व की दृष्टि से मानस की इन चौपाईयों के स्मरण और पाठ से ही अनेक व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और समस्त सांसारिक सुखों और कामनाओं की पूर्ति हो जाती है। सांसारिक सुखों की बात करें तो संतान सुख अहम माना जाता है। खासतौर पर पुत्र प्राप्ति हर दंपत्ति की कामना होती है। रामचरित मानस में विशेष कामनापूर्ति के लिए भी अलग-अलग चौपाईयों के जप का महत्व है। इसी कड़ी में पुत्र प्राप्ति की कामना से इस चौपाई का यथाविधि पाठ बहुत ही प्रभावी माना गया है। जानते हैं यह चौपाई और इसके पाठ की आसान विधि -
चौपाई -
प्रेम मगन कौसल्या निसि दिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बाल चरित कर गान॥- इस चौपाई का जप करने के लिए भगवान राम और माता सीता की मूर्ति या राम दरबार की तस्वीर सामनें रखें। - मूर्ति या तस्वीर पर गंध, अक्षत, सुगंधित फूल चढाएं। - मन ही मन पुत्र प्राप्ति की कामना का संकल्प करें। - घी का दीप और धूप या अगरबत्ती जलाकर तुलसी की माला से 108 बार इस चौपाई का जप करें। - जप के बाद फल या मिठाई का भोग लगाएं। श्रीराम की आरती श्रद्धा और विश्वास के साथ करें। - धार्मिक मान्यता है कि इस चौपाई का जप अन्य धार्मिक उपायों या मंत्र की तरह ही प्रभावी होकर मनोरथ पूर्ति करता है।- समय होने पर रामचरित मानस का पाठ भी मनोकामना पूर्ति के लिए श्रेष्ठ होता है।
चौपाई -
प्रेम मगन कौसल्या निसि दिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बाल चरित कर गान॥- इस चौपाई का जप करने के लिए भगवान राम और माता सीता की मूर्ति या राम दरबार की तस्वीर सामनें रखें। - मूर्ति या तस्वीर पर गंध, अक्षत, सुगंधित फूल चढाएं। - मन ही मन पुत्र प्राप्ति की कामना का संकल्प करें। - घी का दीप और धूप या अगरबत्ती जलाकर तुलसी की माला से 108 बार इस चौपाई का जप करें। - जप के बाद फल या मिठाई का भोग लगाएं। श्रीराम की आरती श्रद्धा और विश्वास के साथ करें। - धार्मिक मान्यता है कि इस चौपाई का जप अन्य धार्मिक उपायों या मंत्र की तरह ही प्रभावी होकर मनोरथ पूर्ति करता है।- समय होने पर रामचरित मानस का पाठ भी मनोकामना पूर्ति के लिए श्रेष्ठ होता है।
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