Saturday, November 27, 2010

पंचक में कुछ कार्यों को करना अशुभ

जब चन्द्रमा कुंभ और मीन राशि पर रहता हैं, तब उस समय को पंचक कहते है। यानि घनिष्ठा से रेवती तक जो पांच नक्षत्र (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उतरा भाद्रपद एवं रेवती) होते है उन्हे पंचक कहा जाता है। कुछ विद्वानों ने इन नक्षत्रों को अशुभ माना है। इन नक्षत्रों के स्वभाव के अनुसार कोई भी किया हुआ कार्य पांच बार होता है। इसलिए पंचक में कुछ कार्यों को करना अशुभ माना गया है।
नक्षत्रों का प्रभाव-
धनिष्ठा नक्षत्र में अग्नि का भय रहता है।
शतभिषा नक्षत्र में कलह होने के योग बनते है।
पूर्वाभाद्रपद रोग कारक नक्षत्र होता है।
उतराभाद्रपद में धन के रूप में दण्ड होता है।
रेवती नक्षत्र में धन हानि की संभावना होती है।
पंचक में न करने वाले पांच कार्य-
1-घनिष्ठा नक्षत्र में घास लकड़ी आदि ईंधन इकट्ठा नही करना चाहिए इससे अग्रि का भय रहता है।
2- दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानि कारक माना गया है।
3- रेवती नक्षत्र में घर की छत डालना धन हानि और क्लेश कराने वाला होता है।
4- चारपाई नही बनवाना चाहिए।
5- पंचक में शव का अन्तिम संस्कार नही करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि पंचक में शव का अन्तिम संस्कार करने से उस कुंटुंब में पांच मृत्यु और हो जाती है।
यदि परिस्थितीवश किसी व्यक्ति की मृत्यु पंचक अवधि में हो जाती है तो शव के साथ पांच अन्य पुतले आटे या कुशा से बनाकर अर्थी पर रखें और इन पांचों का भी शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अन्तिम संस्कार करें तो परिवार में बाद में और म़त्यु नही होती एवं पंचक दोष समाप्त हो जाता है।

कौन सा पार्टनर बिजनेस में सफलता दिलाएगा

यदि आप अपने व्यापार में कोई साझेदार रखने का मन बना रहे है तो जान लें किस लग्र या राशि का साझेदार आपको बिजनेस में सफलता दिलाएगा और किस लग्र के साझेदार से आपके बिजनेस में हानि हो सकती है?
कुंडली में स्थित लग्र यानि पहले भाव से जानें-यदि आप जिससे मित्रता का हाथ मिलाने जा रहे हैं अगर उसके लग्न में स्थित राशि आपके लग्न में स्थित राशि से दूसरी हो तो, इस स्थिति में आपको लाभ होगा लेकिन आपके साझेदार को नुकसान होगा, यानी इस रिश्ते में परस्पर मित्रता वाली बात नहीं रहेगी।
साझेदार की कुंडली मे आपकी राशि से तीसरी राशि स्थित है तो वह व्यक्ति बुरे वक्त में काम नहीं आता है यानी जब आप पर कठिन समय आएगा तो वह मदद के लिए आगे नहीं आएगा।
जिस लग्न में आपका जन्म हुआ है उस लग्न से चौथी राशि वाले से आप साझेदारी करते हैं तो सुख के समय दोनों के बीच अच्छा प्यार रहेगा लेकिन जब दु:ख का समय आएगा तो साझेदार मुंह फेर लेगा।
आपकी लग्न राशि से पांचवी राशि के लग्र वालों के बीच होने वाली साझेदारी उत्तम मानी गई है।
आपकी लग्र राशि से छठी राशि वालों से की गई साझेदारी अच्छी नहीं होती है, इस साझेदारी से व्यापार में जरूर हानि होती है।
आपका साझेदार आपकी लग्न राशि से सातवीं राशि का है तो यह दोनों के लिए शुभ है। इस स्थिति में दोनों के अच्छे सम्बन्ध रहते है। साझेदार के भाग्य से आपकी उन्नति होगी।
स्वयं की लग्र राशि से अष्टम राशि वालों की साझेदारी भी दोषपूर्ण मानी गई है।
नौवीं राशि वालों से मित्रगत सम्बन्ध लाभदायक होते है। आपको अपने साथी से सुख एवं अनुकूल सहयोग मिलता है।
दसवीं राशि वाले साथी बहुत अधिक मधुर संबंध नहीं रखते है। आप इनसे जैसा व्यवहार करेंगे यह आपसे उसी प्रकार प्रस्तुत होंगे।
आपके लग्र से एकादश राशि वाला व्यक्ति साझोदारी के लिए बहुत ही अच्छा होता इससे दोनो मित्रों को लाभ मिलता है।
जबकि लग्र से बारहवीं राशि वालों के बीच मित्रता, साझेदारी एवं सम्बन्ध रखना परेशानी और कष्टदायक होता है।

Friday, November 26, 2010

दुश्मन चाहते हुए भी आपका विरोध ना कर पाए

कभी सुख तो कभी दुख, कभी फायदा तो कभी नुकसान। जिंदगी एक जैसी कभी नहीं रहती। परिवर्तन जिंदगी का नियम है। उतार-चढ़ाव जिंदगी में आते जाते रहते हैं। कई बार हमें बिना किसी कारण के ही नुकसान और अपमान का सामना करना पड़ता है कई बार ना चाहते हुए भी कई लोग अनजाने में या किसी गलतफहमी के कारण भी हमारे दुश्मन बन जाते हैं। किसी भी दुश्मन से निपटने के लिए लड़ाई- झगड़ा करने से अच्छा है कि आपका दुश्मन चाहते हुए भी आपका विरोध ना कर पाए इसके लिए बगलामुखी साधना सबसे सरल उपाय है। इस दुर्लभ बगलामुखी साधना की संक्षिप्त विधि इस प्रकार है।आधी रात के समय दक्षिणाभिमुख होकर बैठें। साधना प्रारंभ करने से पूर्व गणपति, इष्ट देवता और गुरु को नमन स्मरण कर प्रार्थना करें। साधक पद्मासन में बैठकर मां बगलामुखी के समक्ष वस्त्र, गंध, फल, तांबूल, धूप, दीप, नैवेध समर्पित करें। इसके बाद नीचे दिए मंत्र का पूर्ण विधि-विधान से 11 माला जप करें। मंत्र:
ओम् ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानाम वाचं, मुखं करं पदं स्तंभेय जिव्हाम कीलय कीलय बुद्धिय नाशय ह्रीं ओम्।

पूर्ण नियम कायदों और शास्त्रीय तरीके से करने पर यह साधना जरूर सफल होती है।

गाड़ी नंबर और रंग

यदि आप अपनी गाड़ी का नंबर और रंग, अंक ज्योतिष के अनुसार रखें तो भविष्य में होने वाली दुर्घटनाएं टल जाती है। जानिए अंक ज्यातिष के अनुसार कैसा होना चाहिए आपका गाड़ी नंबर और रंग..
अंक- 1 आपको अपने वाहन के नंबर का कुल योग 1, 2, 4 या 7 रखना चाहिये। पीले, सुनहरे, अथवा हल्के रंग के वाहन खरीदना चाहिए। आप 6 या 8 नंबर वाला वाहन न रखें साथ ही नीले, भूरे, बैंगनी या काले रंग के वाहन न खरीदें।
अंक- 2 आपके लिए वो वाहन अनुकूल है जिनका कुल योग 1, 2, 4 या 7 हो। 9 नंबर वाले वाहन ना रखें। आप सफेद अथवा हल्के रंग का वाहन खरीदें। लाल अथवा गुलाबी रंग की वाहन न लें।
अंक-3 आपकी गाड़ी नंबर का कुल योग 3,6, या 9 होना चाहिये। 5 या 8 नंबर वाला वाहन आपके लिए अच्छा नही रहेगा। पीले, बैंगनी, या गुलाबी रंग का वाहन खरीदें। हल्के हरे, सफेद ,भुरे रंग के वाहनों से बचें।
अंक-4 इस अंक वालों की गाड़ी नंबर का कुल योग 1, 2, 4 या 7 होना चाहिये। इनको 9, 6 या 8 नंबर वाले वाहन से हानि हो सकती है। नीले या भूरे रंग के वाहन खरीदें और गुलाबी या काले रंग की वाहन न खरीदें।
अंक-5 अगर आपका मूलांक 5 है तो आपको गाड़ी नंबर का कुल योग 5 रखना चाहिये। 3, 9 या 8 नंबर वाला वाहन ना रखें। हल्के हरे, सफेद अथवा भुरे रंग का वाहन खरीदें। पीले, गुलाबी या काले रंग की वाहन से हानि हो सकती है।
अंक-6 मूलांक 6 वालों को गाड़ी नंबर का कुल योग 3, 6, या 9 रखना चाहिये। 4 या 8 नंबर से बचें। आपको हल्के नीले, गुलाबी, अथवा पीले रंग का वाहन खरीदना चाहिए। काले रंग का वाहन क्रय करने से बचें।
अंक -7 आपकी गाड़ी नंबर का कुल योग 1, 2, 4 या 7 होना चाहिए। 9 या 8 नंबर वाला वाहन नही होना चाहिए। नीले, या सफेद रंग का वाहन खरीदें।
अंक-8 इस अंक वालों को अपना गाड़ी नंबर का कुल योग 8 रखना चाहिये। 1 या 4 नंबर वाला वाहन ना रखें तो बेहतर होगा. आपका अंक शनि का अंक है। इसलिए आप काले, नीले, अथवा बैगनी रंग के वाहन खरीदें।
अंक-9 मूलांक 9 वाले लोग आपनी गाड़ी नंबर का कुल योग 9, 3, या 6 रखे तो उन्हे अच्छा लाभ मिलता है। 5 या 7 नंबर वाले वाहन से नुकसान हो सकता है। बेहतर होगा आप लाल, या गुलाबी रंग का वाहन खरीदें।
यदि आपने कोई नया वाहन खरीदा हैं और आपके मन में हमेशा यही डर बना रहता है कि आपके या आपके परिवार के किसी भी सदस्य की थोड़ी सी भी लापरवाही से कहीं आपकी नए वाहन का एक्सीडेंट न हो जाए। कई बार हमारे साथ ऐसा होता है कि नए वाहन खरीदने के कुछ दिनों के भीतर ही कोई एक्सीडेंट हो जाता है। वाहन में खराबी आ जाती है। आपको भी चोट लगती है। आपकी अशुभ ग्रहों की दशा या अंतरदशा चल रही हैं या अनजाने में आपने अशुभ मुहूर्त में वाहन खरीद लिया हैं, तो घबराए नहीं नीचे लिखे उपाय को अपनाकर आप किसी भी तरह की वाहन दुर्घटना को टाल सकते हैं।- शनिवार को काले रंग की एक पोटली में काले तिल, सुपारी और सिन्दूर रखकर उसे अपने वाहन पर आगे की ओर बांध दें। इस उपाय को अपनाकर आप अपने वाहन को किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा सकते हैं।

Thursday, November 25, 2010

संतान गोद लेने के सही मुहूर्त

विवाह के बाद हर पति-पत्नी को संतान प्राप्त करने की इच्छा होती है। वैसे तो अधिकांश लोगों की संतान सुख प्राप्त करने की कामना तो पूर्ण हो जाती है परंतु कुछ कारणों से कई दंपत्ति इस सुख को प्राप्त नहीं कर पाते। ऐसे में वे किसी अन्य के व्यक्ति के या अनाथालय से बच्चे को गोद लेते हैं। गोद लिए बच्चे भी अपने बच्चे की ही तरह माता-पिता का जीवनभर ध्यान रखें इसके लिए जरूरी है कि सही मुहूर्त में अनाथ बच्चे को अपनाया जाए-संतान गोद लेना बहुत ही पुण्य का काम है। इस पुण्य कार्य को शुभ मुहुर्त में करें तो उत्तम फल प्राप्त होता है। यदि आप शुभ मुहुर्त में संतान गोद लेते हैं तो गोद ली हुई संतान से सुख, आदर एवं सम्मान मिलेगा। शुभ मुहूर्त में गोद ली गई संतान जीवनभर आपकी सेवा करती है साथ ही आपकी मृत्यु के बाद के सभी आवश्यक संस्कार करती है।
दिन या वार का विचार- नक्षत्र और तिथि का विचार करने के बाद वार देख लें क्योंकि इस संदर्भ में वार का भी बहुत महत्व है। ज्योतिष सिद्धान्त के अनुसार संतान गोद लेने के लिए रविवार, मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार काफी शुभ माने गये हैं।
नक्षत्र- वार का विचार करने के बाद ये देख लें कि इस शुभ कार्य के दिन कौन सा नक्षत्र आ रहा है? संतान को गोद लेने के लिए कुछ नक्षत्रों को शुभ माना गया है। उनमें से 3 नक्षत्र, पुष्य, अनुराधा और पूर्वाफाल्गुनी को बहुत उत्तम माना गया है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ऊपर बताए गए वार को ये नक्षत्र हो उस दिन संतान गोद ले सकते है।तिथि- ज्योतिषशास्त्र के अनुसार संतान गोद लेने के लिए शुभ तिथियों का चयन करना चाहिए। जिस दिन प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी में से कोई तिथि के साथ ऊपर बताए गए वार एवं नक्षत्रों का योग बन रहा हो, उस दिन यह शुभ कार्य करें। शास्त्रों में ये तिथियां कार्य सिद्धि करने वाली, धन देने वाली और शुभ कार्य को करने के लिए बताइ गई हैं।

बालक रोया या नहीं
जन्म लेते ही बालक रोना शुरू कर देता है। अगर वह नही रोया तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। राशिगत स्वभाव के कारण भी यह होता है। अपनी राशि के अनुसार ही बालक रोते हंै। मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, मीन यह राशि शब्द वाली है। इन राशियों में जन्म लेने वाला जातक जन्म लेते ही रोना शुरू कर देता है।कन्या तथा कुम्भ यह दोनों राशि अद्र्ध शब्द वाली है। इन राशियों में जन्म लेना वाला बालक थोड़ा रोकर चुप हो जाता है, फिर बड़े जोर से रोता है।कर्क, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर राशियां निशब्द होती है। इनमें जन्म लेने वाला बालक जन्म लेते समय रोते नहीं बहुत देरी के बाद रोता है।चंद्रमा का बल भी इसमे कारक होता है।जिसका ज्यादा चंद्र बली होता है। वह उतना कम रोने वाला होता है।

Tuesday, November 23, 2010

शुक्र और चन्द्र सुन्दरता के प्रतीक

कहते हैं सुन्दरता अपने आप में एक खजाना है। जिसको भगवान ये खजाना देता है वह लोगों को सहज ही अपनी तरफ आकर्षित कर लेता है। इसलिए हर इंसान चाहता है कि वह सुन्दर दिखाई दें लेकिन हर व्यक्ति सुन्दर नहीं दिख सकता है क्योंकि ज्योतिष के अनुसार सुन्दरता जन्मकुंडली में बैठे ग्रहों के अनुसार होती है। शुक्र और चन्द्र दोनों ग्रह ज्योतिष में सुन्दरता के प्रतीक माने जाते हैं। जिसकी जन्मकुंडली में ये ग्रह शुभ स्थिति में बैठे होते हैं उन लोगों का व्यक्तित्व सभी को अपनी तरफ आकर्षित करता है। यदि कोई व्यक्ति शुक्र ग्रह से प्रभावित होता है तो उसके नयन नक्श सुन्दर होते हैं। ऐसे ही यदि किसी की कुंडली में चन्द्र उच्च का हो या शुभ प्रभाव देने वाला हो तो यह ग्रह सुन्दरता के साथ ही कामनीयता भी प्रदान करता है। ये दोनों ग्रह जिनकी कुण्डली में शुभ एवं मजबूत स्थित में हों उन्हें ये दोनों ग्रह रूप, सौन्दर्य एवं कोमलता प्रदान करते हैं।
- यदि कुंडली में शुक्र एवं चन्द्र की युति हो तो सुन्दरता मिलती है लेकिन, इनमें ध्यान देने वाली बात यह होती है कि इन दोनों ग्रहों की युति किस भाव एवं राशि में हो रही है। ग्रहों की दृष्टि तथा अन्य ग्रहों का इनपर प्रभाव भी काफी मायने रखता है।
- चन्द्र ,शुक्र की युति और सौन्दर्य चन्द्र एवं शुक्र की युति किसी भाव में होने पर आमतौर पर यह माना जाता है कि व्यक्ति सुन्दर एवं आकर्षक होगा. परंतु, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार चन्द्र शुक्र की युति किस राशि में हो रही है यह सौन्दर्य में विचारणीय होता है।
- शुक्र की राशि में शुक्र चन्द्र की युति वृष एवं तुला शुुक्र की राशि होती है. शुक्र जब अपनी राशि में होता है तो शुक्र की स्थिति मजबूत होती है. शुक्र चमकीला ग्रह है इसके साथ चन्द्र की युति होने से व्यक्ति का रंग गोरा एवं निखरा होता है. इनकी त्वचा दुधिया गोरापन लिये होती है. व्यक्ति बहुत ही आकर्षक होता है.
- चन्द्र कर्क राशि का स्वामी है। चन्द्रमा यदि शुक्र के साथ अपने घर में बैठा हो तो उसी प्रकार का फल देता है जैसे तुला एवं वृष राशि में शुक्र चन्द्र की युति का फल होता है अर्थात व्यक्ति बहुत ही गोरा एवं आकर्षक दिखता है।ये कोमल एवं मासूम नजऱ आते हैं।
- बुध की राशि में शुक्र चन्द्र की युति मिथुन एवं कन्या राशि बुध की राशि होती है। बुध को भी त्वचा का कारक माना जाता है। बुध की राशि में शुक्र एवं चन्द्र की युति होने पर व्यक्ति सुन्दर तथा मोहक होता है।. इनका कद कुछ लम्बा होता है। नयन नक्श सुन्दर होते हैं परंतु कुछ सांवले दिखाई देते हैं।
- धनु एवं मीन राशि का स्वामी गुरू होता है। गुरू की इन राशियों में शुक्र एवं चन्द्र की युति सौन्दर्य की दृष्टि से बहुत ही अच्छी मानी जाती है। इस राशि में इन दोनों ग्रहों की युति होने से व्यक्ति बहुत ही सुन्दर होता है। शुक्र चन्द्र की युति से शारीरिक बनावट आकर्षक होती है। गुरू के प्रभाव के कारण इनका रंग निखरा होता है। इनकी त्वचा में पीली आभा झलकती है जो इनके सौन्दर्य को बहुत ही मोहक बनाती है।
- मंगल की राशि में शुक्र चन्द्र की युति मंगल की राशि में शुक्र चन्द्र की युति होने पर व्यक्ति खूबसूरत होता है। मंगल का प्रभाव भी व्यक्ति पर दिखता है इसलिए इनका रंग गेहुंआ तथा लालिमा लिये होता है।
- शनि की राशि में शुक्र चन्द्र की युति शनि की राशि मकर एवं कुम्भ है इन शुक्र चन्द्र की युति होने पर व्यक्ति लम्बा होता है। इनका रंग सांवला होता है परंतु इनकी त्वचा में चमक होती है।शरीर थोड़ा रूखा एवं कठोर भी प्रतीत होता है लेकिन, शुक्र चन्द्र की युति के कारण ये सांवले सलोने लगते हैं।
- सिंह राशि का स्वामी सूर्य है।सिंह राशि में चन्द्र एवं शुक्र की युति होने पर व्यक्ति लम्बा होता है।मस्तिष्क उन्नत तथा तेज से परिपूर्ण होता है जिससे यह आकर्षक लगते हैं इनका रंग लालिमा लिए होता है।त्वचा की देख-रेख में कमी करने पर ये सांवले दिख सकते हैं।

Saturday, November 20, 2010

जीवन साथी कहां मिलेगा ?

शादी के लिए माता-पिता को लड़की या लड़के की तलाश करते समय काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर यह पता हो कि विवाह किस दिशा और कितनी दूर होना है तो वर या वधू की तलाश करना माता-पिता के लिए आसान हो जाता है. सप्तम स्थान यानि सातवें भाव को विवाह, पति-पत्नी और दाम्पत्य जीवन के लिए देखा जाता है।
सप्तम भाव में ग्रह और राशि की स्थिति से जानिए, कहां होगी आपकी शादी?
कहां होगी शादी- अगर सप्तम भाव यानि कुंडली में सातवें स्थान में वृष (2 नंबर लिखा हो तो), कुंभ(11) या फिर वृश्चिक राशि(8) है तो यह समझना चाहिए कि व्यक्ति का जीवनसाथी माता-पिता के घर से लगभग 70-75 किलोमीटर दूर है।
मिथुन(3), कन्या(6), धनु(9) या फिर मीन(12) राशि सप्तम भाव में है तो जीवनसाथी की तलाश के लिए लगभग 125 किलोमीटर तक जाना पड़ सकता है। सप्तम भाव में मेष(1), कर्क (4), तुला(7) या मकर(10) राशि होने पर जीवनसाथी 200 किलोमीटर या उससे और अधिक दूर होता है।

किस दिशा में होगी शादी:-यदि सप्तम भाव में मेष राशि के साथ सूर्य हो तो पूर्व दिशा में शादी होने के योग बनते हैं।- शुक्र यदि तुला राशि के साथ हो तो पश्चिम दिशा में शादी होती है। - मीन राशि उत्तर दिशा में उदय होती है यदि यह राशि अपने स्वामी गुरु के साथ सातवें भाव में हो तो उत्तर दिशा विवाह के लिए उचित रहती है।- सप्तम भाव में कन्या राशि के साथ बुध का होना दक्षिण दिशा में विवाह होने का संकेत देता है।