Friday, December 31, 2010

शुक्र गायत्री मंत्र का जप

सरल शब्दों में कहें तो इस मंत्र का जप व्यक्ति को तन, मन से जोशीला और जवां बनाए रखता है। जिससे हर कोई भौतिक सुखों को प्राप्त करने में सक्षम बन सकता है।
असल में ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक शुक्र का शुभ प्रभाव ही सांसारिक सुखों को नियत करता है। जैसे घर, वाहन, सुविधा। यह सहूलियत ही किसी भी व्यक्ति को मनचाहे लक्ष्य पाने में मदद करती है। वह उमंग और उत्साह से भरा होता है। इसी तरह शुक्र ग्रह यौन अंगों, रज और वीर्य का कारक भी है। जिससे वह किसी व्यक्ति में सुंदरता और शारीरिक सुख की ओर खिंचाव पैदा करता है। धर्म की भाषा में कहें तो शुक्र का शुभ होना चार पुरुषार्थ में एक काम को पाने में अहम भूमिका निभाता है। यही कारण है कि कुण्डली में शुक्र के बली होने से व्यक्ति यौन सुख पाता है। वहीं कमजोर होने पर रज और वीर्य विकार से व्यक्ति का चेहरा तेजहीन और शरीर दुर्बल हो जाता है। शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह को शुभ और बली बनाने के लिए इस शुक्र मंत्र के जप का विधान बताया गया है -
- शुक्रवार के दिन किसी नवग्रह मंदिर या घर के देवालय में यथासंभव शुक्रदेव की सोने से बनी मूर्ति या लिंग रूप प्रतिमा की यथाविधि पूजा करें। - पूजा में दो सफेद वस्त्र, सफेद फूल, गंध और अक्षत चढ़ाएं। - पूजा के बाद शुक्रदेव को खीर या घी से बने सफेद पकवान का भोग लगाएं। - पूजा के बाद इस शुक्र गायत्री मंत्र का यथाशक्ति जप कर अंत में अगरबत्ती या घी के दीप जलाकर आरती करें। कम से कम 108 बार इस मंत्र का जप करना श्रेष्ठ होता है
- ऊँ भृगुवंशजाताय विद्यमहे।
श्वेतवाहनाय धीमहि।
तन्न: कवि: प्रचोदयात॥
इस मंत्र से शुक्र ग्रह का देव रूप स्मरण शारीरिक, मानसिक रुप से जोश, उमंग बनाए रख तमाम सुखों को देने वाला होता है।

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