शिव का महामृत्यंजय रूप पीड़ा और दु:खों से मुक्त कर सुख और आनंद देने वाला माना गया है। शिव के इस कल्याणकारी रूप की भक्ति और साधना के लिए महामृत्युंजय मंत्र के जप को बहुत ही शुभ और सिद्ध माना गया है। पुराणों में इसे मृत संजीवनी मंत्र बताया गया है। इस मंत्र के असर और शक्ति का महत्व दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य ने महर्षि दधीचि को बताया था।धार्मिक मान्यताओं में महामृत्युंजय मंत्र ऐसा सिद्ध मंत्र जिसके जप या उच्चारण मात्र से ही कड़ी से बड़ी विपत्ति से छुटकारा मिल जाता है। यह मंत्र न केवल अकाल मौत और मृत्यु भय से बचाता है। बल्कि इसके जप मात्र से कुंटुब की भी रोगों और और शत्रुओं से रक्षा भी होती है। दौलत, वैभव, मान-सम्मान भी इस मंत्र के प्रभाव मिल जाता है।शिव उपासना के विशेष दिन सोमवार, प्रदोष, अष्टमी, चतुर्दशी पर शिव पूजा के साथ इस मंत्र का जप बहुत ही सिद्ध माना जाता है। महामृत्युंजय का यह सिद्ध मंत्र इस प्रकार है -
ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम।
उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात।।
इस मंत्र के जप की अलग-अलग प्रयोजन के लिए नियत संख्या बताई गई है। जिसे किसी विद्वान ब्राह्मण से विधि-विधान, हवन और ब्रह्मभोज के साथ कराया जाना शास्त्रों के मुताबिक सुनिश्चित फल देता है।
Saturday, January 1, 2011
Friday, December 31, 2010
तो जल्दी ही स्वस्थ्य हो जाएंगे
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की शुभ अशुभ स्थिति के कारण ही कोई बीमारी होती है यदि आप अपनी राशि के अनुसार कोई उपचार या उपाय करें तो जल्दी ही स्वस्थ्य हो जाएंगे। इन उपायों में अपने राशि स्वामी के अनुसार दान और पूजा कर सकते हैं।
मेष राशि- आपकी राशि का स्वामी मंगल है इसलिए आप अपने राशि स्वामी मंगल के उपाय करें तों बड़ी बीमारीयों से बच जाऐंगे। यदि आप मसूर की दाल लाल कपड़े में रख कर दान दें तो आपको लाभ होगा।
वृषभ राशि- सफेद गाय को घास खिलाएं और शुक्र्र देव से संबंधित दान करें।
मिथुन राशि- 10 वर्ष से कम उम्र की कन्या को भोजन कराएं और भेंट दें तो आपकी बीमारीयां खत्म हो जाएगी।
कर्क राशि- अपनी राशि के अनुसार आप चिंटीयों को आटा डालें तो बीमारीयों से बच जाएंगे।
सिंह राशि- रोज सुबह सूर्योदय के साथ सूर्य को तांबे के बर्तन से जल चढ़ाए। सावधानी रखें की जल चढ़ाते समय चढ़ा हुआ जल किसी बर्तन में इकट्ठा कर के उस जल से किसी पौधें को सींच दें।
कन्या राशि- राशि स्वामी बुध के अनुसार आप किन्नरों को हरी चूड़ियाँ दान दें।
तुला राशि- आपको अपनी राशि के अनुसार गाय का घी, दही और रूई किसी मंदिर में दान दें।
वृश्चिक राशि- बीमारीयों से नीजात पाने के लिए आप गाय को गुड़ खिलाएं।
धनु राशि- पीली गाय की सेवा करने से आपके सारे रोग दूर हो जाएंगे।
मकर राशि- आपकी राशि शनि की राशि होने के कारण आप काले कुत्ते को रोटी दें।
कुम्भ राशि- किसी गरीब को काला कंबल दान दे तो आप नीरोगी रहेंगे।
मीन राशि- पीपल के पेड़ में जल सींचने से आपको कोई रोग परेशान नही करेगा।
मेष राशि- आपकी राशि का स्वामी मंगल है इसलिए आप अपने राशि स्वामी मंगल के उपाय करें तों बड़ी बीमारीयों से बच जाऐंगे। यदि आप मसूर की दाल लाल कपड़े में रख कर दान दें तो आपको लाभ होगा।
वृषभ राशि- सफेद गाय को घास खिलाएं और शुक्र्र देव से संबंधित दान करें।
मिथुन राशि- 10 वर्ष से कम उम्र की कन्या को भोजन कराएं और भेंट दें तो आपकी बीमारीयां खत्म हो जाएगी।
कर्क राशि- अपनी राशि के अनुसार आप चिंटीयों को आटा डालें तो बीमारीयों से बच जाएंगे।
सिंह राशि- रोज सुबह सूर्योदय के साथ सूर्य को तांबे के बर्तन से जल चढ़ाए। सावधानी रखें की जल चढ़ाते समय चढ़ा हुआ जल किसी बर्तन में इकट्ठा कर के उस जल से किसी पौधें को सींच दें।
कन्या राशि- राशि स्वामी बुध के अनुसार आप किन्नरों को हरी चूड़ियाँ दान दें।
तुला राशि- आपको अपनी राशि के अनुसार गाय का घी, दही और रूई किसी मंदिर में दान दें।
वृश्चिक राशि- बीमारीयों से नीजात पाने के लिए आप गाय को गुड़ खिलाएं।
धनु राशि- पीली गाय की सेवा करने से आपके सारे रोग दूर हो जाएंगे।
मकर राशि- आपकी राशि शनि की राशि होने के कारण आप काले कुत्ते को रोटी दें।
कुम्भ राशि- किसी गरीब को काला कंबल दान दे तो आप नीरोगी रहेंगे।
मीन राशि- पीपल के पेड़ में जल सींचने से आपको कोई रोग परेशान नही करेगा।
शुक्र गायत्री मंत्र का जप
सरल शब्दों में कहें तो इस मंत्र का जप व्यक्ति को तन, मन से जोशीला और जवां बनाए रखता है। जिससे हर कोई भौतिक सुखों को प्राप्त करने में सक्षम बन सकता है।
असल में ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक शुक्र का शुभ प्रभाव ही सांसारिक सुखों को नियत करता है। जैसे घर, वाहन, सुविधा। यह सहूलियत ही किसी भी व्यक्ति को मनचाहे लक्ष्य पाने में मदद करती है। वह उमंग और उत्साह से भरा होता है। इसी तरह शुक्र ग्रह यौन अंगों, रज और वीर्य का कारक भी है। जिससे वह किसी व्यक्ति में सुंदरता और शारीरिक सुख की ओर खिंचाव पैदा करता है। धर्म की भाषा में कहें तो शुक्र का शुभ होना चार पुरुषार्थ में एक काम को पाने में अहम भूमिका निभाता है। यही कारण है कि कुण्डली में शुक्र के बली होने से व्यक्ति यौन सुख पाता है। वहीं कमजोर होने पर रज और वीर्य विकार से व्यक्ति का चेहरा तेजहीन और शरीर दुर्बल हो जाता है। शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह को शुभ और बली बनाने के लिए इस शुक्र मंत्र के जप का विधान बताया गया है -
- शुक्रवार के दिन किसी नवग्रह मंदिर या घर के देवालय में यथासंभव शुक्रदेव की सोने से बनी मूर्ति या लिंग रूप प्रतिमा की यथाविधि पूजा करें। - पूजा में दो सफेद वस्त्र, सफेद फूल, गंध और अक्षत चढ़ाएं। - पूजा के बाद शुक्रदेव को खीर या घी से बने सफेद पकवान का भोग लगाएं। - पूजा के बाद इस शुक्र गायत्री मंत्र का यथाशक्ति जप कर अंत में अगरबत्ती या घी के दीप जलाकर आरती करें। कम से कम 108 बार इस मंत्र का जप करना श्रेष्ठ होता है
- ऊँ भृगुवंशजाताय विद्यमहे।
श्वेतवाहनाय धीमहि।
तन्न: कवि: प्रचोदयात॥
इस मंत्र से शुक्र ग्रह का देव रूप स्मरण शारीरिक, मानसिक रुप से जोश, उमंग बनाए रख तमाम सुखों को देने वाला होता है।
असल में ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक शुक्र का शुभ प्रभाव ही सांसारिक सुखों को नियत करता है। जैसे घर, वाहन, सुविधा। यह सहूलियत ही किसी भी व्यक्ति को मनचाहे लक्ष्य पाने में मदद करती है। वह उमंग और उत्साह से भरा होता है। इसी तरह शुक्र ग्रह यौन अंगों, रज और वीर्य का कारक भी है। जिससे वह किसी व्यक्ति में सुंदरता और शारीरिक सुख की ओर खिंचाव पैदा करता है। धर्म की भाषा में कहें तो शुक्र का शुभ होना चार पुरुषार्थ में एक काम को पाने में अहम भूमिका निभाता है। यही कारण है कि कुण्डली में शुक्र के बली होने से व्यक्ति यौन सुख पाता है। वहीं कमजोर होने पर रज और वीर्य विकार से व्यक्ति का चेहरा तेजहीन और शरीर दुर्बल हो जाता है। शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह को शुभ और बली बनाने के लिए इस शुक्र मंत्र के जप का विधान बताया गया है -
- शुक्रवार के दिन किसी नवग्रह मंदिर या घर के देवालय में यथासंभव शुक्रदेव की सोने से बनी मूर्ति या लिंग रूप प्रतिमा की यथाविधि पूजा करें। - पूजा में दो सफेद वस्त्र, सफेद फूल, गंध और अक्षत चढ़ाएं। - पूजा के बाद शुक्रदेव को खीर या घी से बने सफेद पकवान का भोग लगाएं। - पूजा के बाद इस शुक्र गायत्री मंत्र का यथाशक्ति जप कर अंत में अगरबत्ती या घी के दीप जलाकर आरती करें। कम से कम 108 बार इस मंत्र का जप करना श्रेष्ठ होता है
- ऊँ भृगुवंशजाताय विद्यमहे।
श्वेतवाहनाय धीमहि।
तन्न: कवि: प्रचोदयात॥
इस मंत्र से शुक्र ग्रह का देव रूप स्मरण शारीरिक, मानसिक रुप से जोश, उमंग बनाए रख तमाम सुखों को देने वाला होता है।
Thursday, December 30, 2010
बुध ग्रह बुद्धिमत्ता और वाकपटुता का निर्धारक
सनातन धर्म की खासियत है कि वह इंसान का धर्म के माध्यम से प्रकृति के साथ गहरा संबंध बनाती है। इसी परंपरा में ब्रह्मांड में स्थित सभी ग्रह, नक्षत्रों को ईश्वर मानकर उनकी पूजा और उपासना के विधान शास्त्रों में बताए गए। इन उपायों से इंसान को सुखों की कामना पूर्ति के साथ पीड़ाओं और कष्टों से मुक्ति की राह भी मिली।
इसी कड़ी में बुधवार के दिन बुध ग्रह की देव रुप में उपासना का महत्व है। पौराणिक और ज्योतिष विज्ञान में बुध का महत्व बताया गया है। पुराणों में बुध ग्रह, चंद्र देव और तारा की संतान है। लिंग पुराण के अनुसार बुध चंद्रमा और रोहिणी की संतान माने जाते हैं। जबकि विष्णु पुराण बुध चंद्रमा और बृहस्पति की पत्नी तारा की संतान है। बुध देव चार भुजाओं वाले हैं और उनका वाहन सिंह है।ज्योतिष विज्ञान के अनुसार बुध ग्रह बुद्धिमत्ता और वाकपटुता का निर्धारक है। बुध के शुभ प्रभाव से किसी भी व्यक्ति को विद्वान, शिक्षक, कलाकार और सफल व्यवसायी बना सकता है।कड़ी प्रतियोगिता के दौर में आज का युवाओं के लिए भी मजबूत मानसिक क्षमताओं का होना बहुत जरूरी है। क्योंकि अच्छे कॅरियर बनाने के लिए शिक्षा व ज्ञान बहुत अहम है। अगर आप भी तेज दिमाग, मानसिक शक्ति, एकाग्रता चाहें तो बुधवार के दिन बुध देव की प्रसन्नता के यह मंत्र जप जरूर करें -
- सुबह स्नान कर किसी नवग्रह मंदिर या घर के देवालय में बुधदेव की मूर्ति की पंचोपचार पूजा करें। - पूजा में खासतौर पर हरी पूजा सामग्री भी चढ़ाएं। गंध, अक्षत, फूल के अलावा हरे वस्त्र अर्पित करें। गुड़, दही और भात का भोग लगाएं।- धूप और अगरबत्ती, दीप जलाकर पूजा-आरती करें।- पूजा या आरती के बाद बुध देव का बीज मंत्र ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम: या ऊँ बुं बुधाय नम: का यथाशक्ति मंत्र जप करें। - कम से कम 108 बार मंत्र जप अवश्य करें।
इसी कड़ी में बुधवार के दिन बुध ग्रह की देव रुप में उपासना का महत्व है। पौराणिक और ज्योतिष विज्ञान में बुध का महत्व बताया गया है। पुराणों में बुध ग्रह, चंद्र देव और तारा की संतान है। लिंग पुराण के अनुसार बुध चंद्रमा और रोहिणी की संतान माने जाते हैं। जबकि विष्णु पुराण बुध चंद्रमा और बृहस्पति की पत्नी तारा की संतान है। बुध देव चार भुजाओं वाले हैं और उनका वाहन सिंह है।ज्योतिष विज्ञान के अनुसार बुध ग्रह बुद्धिमत्ता और वाकपटुता का निर्धारक है। बुध के शुभ प्रभाव से किसी भी व्यक्ति को विद्वान, शिक्षक, कलाकार और सफल व्यवसायी बना सकता है।कड़ी प्रतियोगिता के दौर में आज का युवाओं के लिए भी मजबूत मानसिक क्षमताओं का होना बहुत जरूरी है। क्योंकि अच्छे कॅरियर बनाने के लिए शिक्षा व ज्ञान बहुत अहम है। अगर आप भी तेज दिमाग, मानसिक शक्ति, एकाग्रता चाहें तो बुधवार के दिन बुध देव की प्रसन्नता के यह मंत्र जप जरूर करें -
- सुबह स्नान कर किसी नवग्रह मंदिर या घर के देवालय में बुधदेव की मूर्ति की पंचोपचार पूजा करें। - पूजा में खासतौर पर हरी पूजा सामग्री भी चढ़ाएं। गंध, अक्षत, फूल के अलावा हरे वस्त्र अर्पित करें। गुड़, दही और भात का भोग लगाएं।- धूप और अगरबत्ती, दीप जलाकर पूजा-आरती करें।- पूजा या आरती के बाद बुध देव का बीज मंत्र ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम: या ऊँ बुं बुधाय नम: का यथाशक्ति मंत्र जप करें। - कम से कम 108 बार मंत्र जप अवश्य करें।
बिजनेस में निश्चित सफलता प्राप्त करें
कारोबार में असफलता का सामना करना पड़ रहा है? कर्ज में डूब रहे हैं। बिजनेस में सिर्फ नुकसान हो रहा हो तो। आप हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं पर कोई फायदा नहीं हो रहा हो तो नीचे लिखे टोटकों को अपनाकर आप बिजनेस में निश्चित सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
- कार्यस्थल पर अधिक से अधिक पीले रंग का प्रयोग करें। पूजाघर में हल्दी की माला लटकाएं। भगवान लक्ष्मी नारायण के मंदिर में लड्डुओं का भोग लगाएं।- शनिवार के दिन रक्तगुंजा के इक्कीस दाने बांधकर तिजोरी में रख दें। हर रोज दीप अवश्य लगाएं।- महीने के प्रथम गुरूवार से इस प्रयोग को शुरू करें नियमित रूप से186 दिन तक इस प्रयोग को करें। रोज पीपल या बरगद के नीचे चौ मुखी दीपक लगाएं। एक पाठ विष्णुसहस्त्रनाम रोज करें।- हर शाम गोधुली बेला में लक्ष्मी जी की तस्वीर के समक्ष गाय के घी का दीपक लगाएं। दीपक जलाने के बाद उसके अंदर अपने इष्ट देव का ध्यान करके एक इलायची डाल दें। इस प्रयोग को नियमित रूप से 186 दिन तक दोहराएं।- मिट्टी के पांच पात्र लेकर उसमें हर पात्र में सवा किलो जौ, सवा किलो उड़द, सवा किलो साबुत मुंग, सवा किलो सफेद तिल, सवा किलो पीली सरसों इन सभी को पांच पात्रों में भरकर पात्र के मुंह को लाल कपड़े से बांध दे। व्यवसायिक स्थल पर इन पांचों कलश को रख दें। एक साल बाद इन सभी पात्रों को अपने ऊपर से उतारकर नदी में प्रवाहित करें।
- कार्यस्थल पर अधिक से अधिक पीले रंग का प्रयोग करें। पूजाघर में हल्दी की माला लटकाएं। भगवान लक्ष्मी नारायण के मंदिर में लड्डुओं का भोग लगाएं।- शनिवार के दिन रक्तगुंजा के इक्कीस दाने बांधकर तिजोरी में रख दें। हर रोज दीप अवश्य लगाएं।- महीने के प्रथम गुरूवार से इस प्रयोग को शुरू करें नियमित रूप से186 दिन तक इस प्रयोग को करें। रोज पीपल या बरगद के नीचे चौ मुखी दीपक लगाएं। एक पाठ विष्णुसहस्त्रनाम रोज करें।- हर शाम गोधुली बेला में लक्ष्मी जी की तस्वीर के समक्ष गाय के घी का दीपक लगाएं। दीपक जलाने के बाद उसके अंदर अपने इष्ट देव का ध्यान करके एक इलायची डाल दें। इस प्रयोग को नियमित रूप से 186 दिन तक दोहराएं।- मिट्टी के पांच पात्र लेकर उसमें हर पात्र में सवा किलो जौ, सवा किलो उड़द, सवा किलो साबुत मुंग, सवा किलो सफेद तिल, सवा किलो पीली सरसों इन सभी को पांच पात्रों में भरकर पात्र के मुंह को लाल कपड़े से बांध दे। व्यवसायिक स्थल पर इन पांचों कलश को रख दें। एक साल बाद इन सभी पात्रों को अपने ऊपर से उतारकर नदी में प्रवाहित करें।
Sunday, December 26, 2010
इष्टसिद्धि में गायत्री मंत्र
इष्टसिद्धि से शक्ति, कामयाबी और इच्छापूर्ति का महत्व बताया गया है। इष्टसिद्धि को सरल शब्दों में समझना चाहें तो इसका मतलब होता है कि व्यक्ति जिस देव शक्ति के लिए श्रद्धा और आस्था मन में बना लेता है, तब उसी के मुताबिक उस देवता से जुड़ी सभी शक्तियां, प्रभाव और वस्तुएं संबंधित को मिलने लगती है। साथ ही वह देव उपासना का वास्तविक लाभ पाता है। इष्टसिद्धि की कड़ी में गायत्री का ध्यान भी बहुत अहम माना जाता है। खासतौर पर तंत्र शास्त्रों में गायत्री साधना में गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों से 24 देव शक्तियों को पाने का फल बताया गया है।
असल में गायत्री मंत्र के हर अक्षर का एक देवता है यानि हर अक्षर देव शक्ति बीज है। इस तरह गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों में 24 देव शक्तियों का आवाहन हो जाता है। इष्टसिद्धि के नजरिए से मात्र एक मंत्र से ही 24 देवताओं का इष्ट और उनसे जुड़ी शक्ति प्राप्त होना बहुत महत्व रखती है। ऐसी इष्टसिद्धि से जिंदगी में किसी भी तरह की भय, परेशानी, बाधा या संकटों का सामना नहीं करना पड़ता।
जानते हैं ऐसे महाशक्तिशाली मंत्र के 24 अक्षरों के 24 देवताओं के नाम -
- श्री गणेश - नृसिंह- विष्णु- शिव -कृष्ण - राधा- लक्ष्मी- अग्रि- इन्द्र - सरस्वती- दुर्गा- हनुमान -पृथ्वी- सूर्य - राम - सीता - चन्द्रमा - यम - ब्रह्मा- वरुण- नारायण- हयग्रीव - हंस- तुलसी
धार्मिक दृष्टि से देव शक्तियां जाग्रत होती है। इसलिए इष्ट रूप में गायत्री और गायत्री मंत्र के स्मरण से ही इन 24 देवताओं के अधीन शक्तियां और पदार्थ भी उपासक को प्राप्त होते हैं। जिससे वह सांसारिक और भौतिक शक्तियों से पूर्ण हो जाता है।
असल में गायत्री मंत्र के हर अक्षर का एक देवता है यानि हर अक्षर देव शक्ति बीज है। इस तरह गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों में 24 देव शक्तियों का आवाहन हो जाता है। इष्टसिद्धि के नजरिए से मात्र एक मंत्र से ही 24 देवताओं का इष्ट और उनसे जुड़ी शक्ति प्राप्त होना बहुत महत्व रखती है। ऐसी इष्टसिद्धि से जिंदगी में किसी भी तरह की भय, परेशानी, बाधा या संकटों का सामना नहीं करना पड़ता।
जानते हैं ऐसे महाशक्तिशाली मंत्र के 24 अक्षरों के 24 देवताओं के नाम -
- श्री गणेश - नृसिंह- विष्णु- शिव -कृष्ण - राधा- लक्ष्मी- अग्रि- इन्द्र - सरस्वती- दुर्गा- हनुमान -पृथ्वी- सूर्य - राम - सीता - चन्द्रमा - यम - ब्रह्मा- वरुण- नारायण- हयग्रीव - हंस- तुलसी
धार्मिक दृष्टि से देव शक्तियां जाग्रत होती है। इसलिए इष्ट रूप में गायत्री और गायत्री मंत्र के स्मरण से ही इन 24 देवताओं के अधीन शक्तियां और पदार्थ भी उपासक को प्राप्त होते हैं। जिससे वह सांसारिक और भौतिक शक्तियों से पूर्ण हो जाता है।
Wednesday, December 22, 2010
केन्द्र स्थान जीवन पर बहुत प्रभाव डालते है
जन्मकुंडली में चार केंद्र स्थान होते हैं। कुंडली में केन्द्र स्थान किसी भी व्यक्ति के जीवन पर बहुत अधिक प्रभाव डालते है . कुंडली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम एवं दशम भाव को केन्द्र भाव माना गया है। पहले भाव को स्वयं के तन का, चौथे भाव को सुख का, सप्तम भाव को वैवाहिक जीवन का और दसवें भाव को कुंडली में कर्मभाव माना गया है।यदि इन चारों भाव में कोई शुभ ग्रह हो तो जातक धनवान होता है। वहीं केंद्र में उच्च के पाप ग्रह बैठे हो तो जातक राजा तो होता ही है पर वह धन से हीन होता है।
- बुध के केंद्र में होने से अध्यापक तथा गुरु के केंद्र में होने से विज्ञानी।
- शुक्र के केंद्र में होने पर धनवान तथा विद्यावान होता है।
- शनि के केंद्र में होने से नीच जनों की सेवा करने वाला होता है।
- यदि केन्द्र में उच्च का सूर्य यदि उच्च हो तथा गुरु केंद्र में चतुर्थ स्थान पर बैठा हो तो जातक आधुनिक केंद्र या राज्य में मंत्री पद को प्राप्त करता है।
- सूर्य के केंद्र में होने से जातक राजा का सेवक, चंद्रमा केंद्र में हो तो व्यापारी, मंगल केंद्र में हो तो व्यक्ति सेना में कार्य करता है।
अगर केन्द्र में कोई ग्रह ना बैठे हों तो ऐसी कुंडली को शुभ नहीं माना जाता है। ऐसा व्यक्ति जीवन में कर्ज से हमेशा परेशान रहता है। इसके लिए नीचे लिखे उपाय करना जातक के लिए फायदेमंद रहता है।
- शिवजी की उपासना करें।- सोमवार का व्रत करें।
- भगवान शिव पर चांदी का नाग अर्पण करें।
- बिल्व पत्रों से 108 आहूतियां दें।
- बुध के केंद्र में होने से अध्यापक तथा गुरु के केंद्र में होने से विज्ञानी।
- शुक्र के केंद्र में होने पर धनवान तथा विद्यावान होता है।
- शनि के केंद्र में होने से नीच जनों की सेवा करने वाला होता है।
- यदि केन्द्र में उच्च का सूर्य यदि उच्च हो तथा गुरु केंद्र में चतुर्थ स्थान पर बैठा हो तो जातक आधुनिक केंद्र या राज्य में मंत्री पद को प्राप्त करता है।
- सूर्य के केंद्र में होने से जातक राजा का सेवक, चंद्रमा केंद्र में हो तो व्यापारी, मंगल केंद्र में हो तो व्यक्ति सेना में कार्य करता है।
अगर केन्द्र में कोई ग्रह ना बैठे हों तो ऐसी कुंडली को शुभ नहीं माना जाता है। ऐसा व्यक्ति जीवन में कर्ज से हमेशा परेशान रहता है। इसके लिए नीचे लिखे उपाय करना जातक के लिए फायदेमंद रहता है।
- शिवजी की उपासना करें।- सोमवार का व्रत करें।
- भगवान शिव पर चांदी का नाग अर्पण करें।
- बिल्व पत्रों से 108 आहूतियां दें।
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