कोई भी इंसान अपनी बुराई सुनना पसंद नहीं करता है। कोई भी नहीं चाहता कि उसका दुनिया में कोई भी दुश्मन हो। कोई कितनी भी कोशिश कर ले उसका कोई ना कोई विरोधी जरूर रहता है। ऐसे में जब कोई आपके पीठ के पीछे आपकी बुराई करता है। सफलता के रास्ते में रोड़े अटकाता है। ऐसे में तनाव होना एक साधारण सी बात है।यह कोई नहीं चाहता कि इस दुनिया में उसका कोई दुश्मन भी हो। यह अनुभव की बात है कि कई बार जहां इंसानी प्रयास सफ ल नहीं होते, वहां कोई तंत्र-मंत्र चमत्कार कर देते हैं। अपने विरोधियों अथवा शत्रुओं को शांत करने, अपने अनुकूल बनाने अथवा अपने वश में करने के लिये, नीचे दिये गए मंत्र का नियमबद्ध जप करना आश्चर्यजनक प्रभाव दिखाता है-
मंत्र- नृसिंहाय विद्महे, वज्र नखाय धी मही,तन्नो नृसिहं प्रचोदयात्
जप सूर्योदय से पूर्व शांत एवं एकांत स्थान पर हो सके तो जल्द ही सफलता मिलती है।
Thursday, January 13, 2011
Monday, January 10, 2011
तीनों ग्रहों के कारण प्रेम होता है
प्रेम विवाह से संबंधित तीन ग्रह होते हैं। यह तीन ग्रह सूर्य, बुध और शुक्र हैं। इन तीनों ग्रहों के कारण व्यक्ति को प्रेम होता है। अगर यह तीनों ग्रह एक साथ एक ही भाव में स्थित हो तो वह व्यक्ति प्रेम विवाह निश्चित करता है। यदि शुक्र, सूर्य और बुध तीनों ग्रह एक ही क्रम में अलग-अलग भावों में हो तो प्रेम होता है परंतु इनका विवाह नहीं हो पाता।सूर्य, बुध और सूर्य इन ग्रहों में से कोई दो युति करते हो और एक अन्य ग्रह भाव में स्थित हो जाए तो बहुत मुश्किल से प्रेम विवाह होता है।सूर्य, बुध सप्तम स्थान में हो तो अपने से बड़ी उम्र का प्रेमी मिलता है। शुक्र बलवान होने पर कई साथी मिलते हैं परतुं अन्य दो ग्रह सूर्य-बुध के कमजोर होने पर व्यक्ति को अपना प्रेम नहीं मिलता।
क्या करें प्रेम विवाह हेतु?
- अपने साथी का नाम लिखकर एक पीपल का पत्ता रविवार, सोमवार और मंगलवार को शिवजी पर चढाएं। शिव चालीसा का पाठ करें। महाकाली का पूजन मंगलवार के दिन करें। मछली को आटे की गोली खिलाएं। मां पार्वती की आराधना करें। श्रीकृष्ण की पूजा करें।
बिल्व पत्र पर चंदन से (श्रीं) लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें।
क्या करें प्रेम विवाह हेतु?
- अपने साथी का नाम लिखकर एक पीपल का पत्ता रविवार, सोमवार और मंगलवार को शिवजी पर चढाएं। शिव चालीसा का पाठ करें। महाकाली का पूजन मंगलवार के दिन करें। मछली को आटे की गोली खिलाएं। मां पार्वती की आराधना करें। श्रीकृष्ण की पूजा करें।
बिल्व पत्र पर चंदन से (श्रीं) लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें।
Sunday, January 9, 2011
मंगल भूमि और भार्या या पत्नी का रक्षक
ब्रह्मांड में स्थित नवग्रह मानवीय जीवन पर अपना अलग-अलग प्रभाव छोड़ते हैं। जिनके अच्छे या बुरे नतीजे भी मिलते हैं। इन नवग्रहों में एक है मंगल। मंगल को नवग्रहों का सेनापति भी माना गया है।अलग-अलग पौराणिक मान्यताओं में मंगल का जन्म भगवान शिव के रक्त, आंसू या तेज से माना गया है। वहीं मंगल का पालन-पोषण पृथ्वी द्वारा किया गया। यही कारण है कि मंगल को भूमिपुत्र भी कहा जाता है। शिव की कृपा से ही मंगल ग्रह के रूप में आकाश में स्थित हुआ।ज्योतिष विज्ञान के मुताबिक मंगल क्रूर ग्रह है, किंतु इसका शुभ प्रभाव व्यक्ति का साहस, पराक्रम, ताकत और उदारता को नियत करता है। व्यावहारिक जीवन में विवाह, संतान सुख, यश, कर्ज और रोगों से मुक्ति भी मंगल ग्रह के शुभ प्रभाव से मिलती है। किंतु मंगल दोष होने पर खून, नेत्र और गले की बीमारियां भी होती है। जीवनसाथी के जीवन पर संकट आता है। वैवाहिक समस्याएं पैदा होती है।
भूमि पुत्र होने से मंगल भूमि और भार्या या पत्नी का रक्षक होता है। जिससे इसका नाम भौम हुआ। मंगल को अंगारक, कुजा के नाम से भी जाना जाता है। यह वृष्टि का देवता भी माना जाता है। वहीं मंगल कठिन हालात और संघर्ष में साहस और जूझने की ताकत देने वाला ग्रह भी है। मंगल के ऐसे ही मंगलकारी और कल्याणकारी स्वरूप और स्वभाव को उज़ागर करते 21 नाम बताए गए हैं। जिनका ध्यान जगत के लिए संकटमोचक और मंगलकारी बताया गया है -
- मंगल, भूमिपुत्र ,ऋणहर्ता,धनप्रदा, स्थिरासन, महाकाय, सर्वकामार्थ साधक, लोहित, लोहिताक्ष, सामगानंकृपाकर,धरात्मज, कुजा, भूमिजा,भूमिनंदन ,अंगारक ,भौम,यम,सर्वरोगहारक,वृष्टिकर्ता, पापहर्ता , सर्वकामफलदाता
भूमि पुत्र होने से मंगल भूमि और भार्या या पत्नी का रक्षक होता है। जिससे इसका नाम भौम हुआ। मंगल को अंगारक, कुजा के नाम से भी जाना जाता है। यह वृष्टि का देवता भी माना जाता है। वहीं मंगल कठिन हालात और संघर्ष में साहस और जूझने की ताकत देने वाला ग्रह भी है। मंगल के ऐसे ही मंगलकारी और कल्याणकारी स्वरूप और स्वभाव को उज़ागर करते 21 नाम बताए गए हैं। जिनका ध्यान जगत के लिए संकटमोचक और मंगलकारी बताया गया है -
- मंगल, भूमिपुत्र ,ऋणहर्ता,धनप्रदा, स्थिरासन, महाकाय, सर्वकामार्थ साधक, लोहित, लोहिताक्ष, सामगानंकृपाकर,धरात्मज, कुजा, भूमिजा,भूमिनंदन ,अंगारक ,भौम,यम,सर्वरोगहारक,वृष्टिकर्ता, पापहर्ता , सर्वकामफलदाता
Saturday, January 8, 2011
शनि के कोप से बचने के लिए
शनिदेव की आराधना का दिन है शनिवार। इस शनिदेव के अशुभ फल को शांत करने एवं शुभ फल को बनाए रखने के लिए विभिन्न पूजन आदि कर्म किए जाते हैं। साथ ही इस दिन के लिए कई नियम भी बनाए गए हैं जिससे शनिदेव का बुरा प्रभाव हम पर न पड़े। इन्हीं नियमों में से एक है कि शनिवार के दिन घर में तेल खरीदकर नहीं लाना चाहिए।
शनि को न्यायधिश माना गया है। इसी वजह से यह काफी कठोर ग्रह है। इसकी क्रूरता से सभी भलीभांति परिचित हैं। इसी वजह से सभी का प्रयत्न रहता है कि शनि देव किसी भी प्रकार से रुष्ट ना हो। शनि गलत कार्य करने वालों को मॉफ नहीं करता। जिसका जैसा कार्य होगा उसे शनि वैसा ही फल प्रदान करता है। ज्योतिष के अनुसार शनि के कोप से बचने के लिए ऐसे कई कार्य मना किए गए हैं जो शनिवार के दिन हमें नहीं करने चाहिए। इन्हीं कार्यों में से एक कार्य यह वर्जित है कि शनिवार को घर में तेल लेकर नहीं आना चाहिए। क्योंकि तेल शनि को अतिप्रिय है और शनिवार को तेल का दान किया जाना चाहिए। इस दिन तेल घर लेकर आने से शनि का बुरा प्रभाव हम पर पड़ता है। यदि घर के किसी सदस्य पर शनि की अशुभ दृष्टि हो तो उसके लिए यह और भी अधिक बुरा फल देने वाला सिद्ध होगा। इन बुरे प्रभावों से बचने के लिए शनिवार के दिन घर में तेल लेकर न आए बल्कि तेल का दान करें और शनि देव को तेल अर्पित करें।
शास्त्रों में शनि को न्याय का देवता बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि वह न्याय करने के साथ दण्ड भी देते हैं। यहीं नहीं शास्त्रों में शनि की वक्रदृष्टि से अनेक देवी-देवताओं के आहत होने का भी वर्णन है। इन कार्यों और रूपों से ही शनि क्रू र देवता माने जाते हैं।
शास्त्रों के मुताबिक शनि सूर्य पुत्र हैं। किंतु माँ का अपमान के कारण उनका अपने पिता सूर्य से बैर हुआ। माता के अपमान न सहन कर पाने से शनि ने शिव की तपस्या कर सूर्य की भांति ही शक्तिशाली और नौ ग्रहों में श्रेष्ठ स्थान पाने का वर प्राप्त किया।
असल में शनिदेव की क्रूर छबि का मतलब यह नहीं है कि वह कष्ट, पीड़ा और दु:खों को देने वाले ही देवता है। बल्कि सत्य यह है कि शनिदेव बुरे कर्मों का ही दण्ड देते हैं। चूंकि हर व्यक्ति जाने-अनजाने मन, वचन और कर्म से कोई न कोई पाप कर्म कर ही देता है। इसलिए वह शनि के कोप का भागी भी बनता है।
शनिदेव बुरे कामों के लिए सजा भी देते हैं तो अच्छे कामों से प्रसन्न भी होते हैं। यही कारण है कि शनि को किस्मत चमकाने वाला देवता भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक शनि शुभ होने पर अपार सुख, समृद्धि देता हैं। साथ ही भाग्य विधाता भी बन जाता है।
शास्त्रों में शनि के चरित्र, स्वरूप बताते ऐसे ही दस नामों का वर्णन है। जिनका स्मरण, ध्यान करने से ही सभी संकट, पीड़ा, भय, बाधा और दु:खों का नाश हो जाता है। जानते हैं शनि के वह दस कल्याणकारी नाम - कोणस्थ - पिंगल - बभ्रु - कृष्ण - रौद्रान्त- यम- सौरि- शनैश्चर- मन्द- पिप्पलाश्रय
शनि देव को खुश करने के लिए, ये प्रयोग करें-
तेल उड़द और काले कपड़े का दान दें। कोऔं को चावल या खीर खिलाएं।किसी साधु को तवा या अंगीठी का दान दें। शनि देन को तेल चढ़ाएं। नीले कपडे पहने।हनुमान चालिसा का पाठ करें। हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाएं।
शनि को न्यायधिश माना गया है। इसी वजह से यह काफी कठोर ग्रह है। इसकी क्रूरता से सभी भलीभांति परिचित हैं। इसी वजह से सभी का प्रयत्न रहता है कि शनि देव किसी भी प्रकार से रुष्ट ना हो। शनि गलत कार्य करने वालों को मॉफ नहीं करता। जिसका जैसा कार्य होगा उसे शनि वैसा ही फल प्रदान करता है। ज्योतिष के अनुसार शनि के कोप से बचने के लिए ऐसे कई कार्य मना किए गए हैं जो शनिवार के दिन हमें नहीं करने चाहिए। इन्हीं कार्यों में से एक कार्य यह वर्जित है कि शनिवार को घर में तेल लेकर नहीं आना चाहिए। क्योंकि तेल शनि को अतिप्रिय है और शनिवार को तेल का दान किया जाना चाहिए। इस दिन तेल घर लेकर आने से शनि का बुरा प्रभाव हम पर पड़ता है। यदि घर के किसी सदस्य पर शनि की अशुभ दृष्टि हो तो उसके लिए यह और भी अधिक बुरा फल देने वाला सिद्ध होगा। इन बुरे प्रभावों से बचने के लिए शनिवार के दिन घर में तेल लेकर न आए बल्कि तेल का दान करें और शनि देव को तेल अर्पित करें।
शास्त्रों में शनि को न्याय का देवता बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि वह न्याय करने के साथ दण्ड भी देते हैं। यहीं नहीं शास्त्रों में शनि की वक्रदृष्टि से अनेक देवी-देवताओं के आहत होने का भी वर्णन है। इन कार्यों और रूपों से ही शनि क्रू र देवता माने जाते हैं।
शास्त्रों के मुताबिक शनि सूर्य पुत्र हैं। किंतु माँ का अपमान के कारण उनका अपने पिता सूर्य से बैर हुआ। माता के अपमान न सहन कर पाने से शनि ने शिव की तपस्या कर सूर्य की भांति ही शक्तिशाली और नौ ग्रहों में श्रेष्ठ स्थान पाने का वर प्राप्त किया।
असल में शनिदेव की क्रूर छबि का मतलब यह नहीं है कि वह कष्ट, पीड़ा और दु:खों को देने वाले ही देवता है। बल्कि सत्य यह है कि शनिदेव बुरे कर्मों का ही दण्ड देते हैं। चूंकि हर व्यक्ति जाने-अनजाने मन, वचन और कर्म से कोई न कोई पाप कर्म कर ही देता है। इसलिए वह शनि के कोप का भागी भी बनता है।
शनिदेव बुरे कामों के लिए सजा भी देते हैं तो अच्छे कामों से प्रसन्न भी होते हैं। यही कारण है कि शनि को किस्मत चमकाने वाला देवता भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक शनि शुभ होने पर अपार सुख, समृद्धि देता हैं। साथ ही भाग्य विधाता भी बन जाता है।
शास्त्रों में शनि के चरित्र, स्वरूप बताते ऐसे ही दस नामों का वर्णन है। जिनका स्मरण, ध्यान करने से ही सभी संकट, पीड़ा, भय, बाधा और दु:खों का नाश हो जाता है। जानते हैं शनि के वह दस कल्याणकारी नाम - कोणस्थ - पिंगल - बभ्रु - कृष्ण - रौद्रान्त- यम- सौरि- शनैश्चर- मन्द- पिप्पलाश्रय
शनि देव को खुश करने के लिए, ये प्रयोग करें-
तेल उड़द और काले कपड़े का दान दें। कोऔं को चावल या खीर खिलाएं।किसी साधु को तवा या अंगीठी का दान दें। शनि देन को तेल चढ़ाएं। नीले कपडे पहने।हनुमान चालिसा का पाठ करें। हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाएं।
Tuesday, January 4, 2011
ऊँ श्रीराम जय राम जय जय राम।।
भगवान राम की उपासना दिनचर्या और जीवनशैली का अटूट हिस्सा है। क्योंकि श्रीराम ही नहीं बल्कि मात्र उनका नाम ही संकटमोचक माना जाता है। सनातन परंपरा और मूल्यों पर आस्था रखने वाला हर शख्स सोते-जागते, उठते-बैठते या किसी से मिलते वक्त राम नाम लेना नहीं भूलता। क्योंकि भगवान राम का जीवन और चरित्र वैसे ही संघर्षों और उन पर मर्यादाओं से जीत का ऐसा उदाहरण है, जिनसे होकर आम आदमी भी गुजरता है।
राम हर दिल में ही बसते हैं, इसलिए ऐसी आस्था है कि उन सभी मुश्किल हालातों में राम नाम ही दर्द से निज़ात देता है, जिनसे उबरना भी राम ने ही अपने आचरण से जगत को सिखाया।अगर आप भी जीवन में व्यक्तिगत, पारिवारिक, आर्थिक, सामाजिक, प्रशासनिक या शारीरिक कठिनाईयों के दौर से गुजर रहे हैं। मगर जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के चलते कोई बड़ा धार्मिक उपाय न कर पाएं तो यहां बताया जा रहा है इतना आसान किंतु अचूक उपाय जो आपके कष्ट और दु:खों को चमत्कारिक रूप से दूर कर देगा। यह उपाय है भगवान श्रीराम के नाम का स्मरण और जप -
- किसी भी दिन सबेरे स्नान करने के बाद घर के देवालय या काम पर जाते वक्त किसी राम मंदिर में भगवान राम को फूल और धूप बत्ती जलाकर कम से कम पांच मौसमी फल चढ़ावें।
- श्रीराम के सामने प्रणाम कर या दण्डवत होकर राम नाम का ऐसा स्मरण करें -
ऊँ श्रीराम जय राम जय जय राम।।
इस तरह से राम नाम मंत्र जप आपके मनोबल को बनाए रखेगा। जिससे आपकी मनोदशा भी सकारात्मक होगी। राम नाम का यह जप आप चलती राह, कार्यालय जाते वक्त बीच सफर में या कहीं भी फुर्सत के लम्हों में कर सकते हैं। इसके प्रभाव से आप जल्द ही खुद को सुखद स्थिति में पाएंगे।
राम हर दिल में ही बसते हैं, इसलिए ऐसी आस्था है कि उन सभी मुश्किल हालातों में राम नाम ही दर्द से निज़ात देता है, जिनसे उबरना भी राम ने ही अपने आचरण से जगत को सिखाया।अगर आप भी जीवन में व्यक्तिगत, पारिवारिक, आर्थिक, सामाजिक, प्रशासनिक या शारीरिक कठिनाईयों के दौर से गुजर रहे हैं। मगर जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के चलते कोई बड़ा धार्मिक उपाय न कर पाएं तो यहां बताया जा रहा है इतना आसान किंतु अचूक उपाय जो आपके कष्ट और दु:खों को चमत्कारिक रूप से दूर कर देगा। यह उपाय है भगवान श्रीराम के नाम का स्मरण और जप -
- किसी भी दिन सबेरे स्नान करने के बाद घर के देवालय या काम पर जाते वक्त किसी राम मंदिर में भगवान राम को फूल और धूप बत्ती जलाकर कम से कम पांच मौसमी फल चढ़ावें।
- श्रीराम के सामने प्रणाम कर या दण्डवत होकर राम नाम का ऐसा स्मरण करें -
ऊँ श्रीराम जय राम जय जय राम।।
इस तरह से राम नाम मंत्र जप आपके मनोबल को बनाए रखेगा। जिससे आपकी मनोदशा भी सकारात्मक होगी। राम नाम का यह जप आप चलती राह, कार्यालय जाते वक्त बीच सफर में या कहीं भी फुर्सत के लम्हों में कर सकते हैं। इसके प्रभाव से आप जल्द ही खुद को सुखद स्थिति में पाएंगे।
Sunday, January 2, 2011
इन टोटकों से होगी मनोकामना पूरी
तंत्र विज्ञान मे कुछ ऐसे टोटके हैं जिन्हे अपनाकर आप निश्चित ही अपनी सारी मनोकामनाओं को पूर्ण कर सकते हैं।
यदि आप चाहते हैं आपकी हर एक मनोकामना पूरी हो तो आपकी राशि के अनुसार नीचे लिखें टोटको को पूरी श्रद्धा से अपनाएं निश्चित ही आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
मेष- ग्यारह हनुमान जी को सिन्दूर का चोला चढ़ाएं या वर्ष में एक बार हनुमान जी के किसी मन्दिर में रामध्वजा लगवाएं।
वृषभ- ग्यारह शुक्रवार लक्ष्मीजी या देवी के मन्दिर में खुशबु वाली अगरबत्ती चढ़ाएं और खीर का प्रसाद बांटे।
मिथुन- रोज कुछ भी खाने से पूर्व इलायची और तुलसीदल गणपति के स्मरण के साथ सेवन करें।कर्क- भगवान शिव को हर सोमवार को मीठा दूध चढ़ाएं।
सिंह- जल में रोली और शहद मिलाकर रोज सूर्यदेव को तांबे के लोटे से अघ्र्य दें।
कन्या- २१ बुधवार गणेश जी को दूर्वा, गुड़ व साबुत मूंग चढाएं।
तुला- शुभ कार्य के लिए निकलने से पहले तुलसी के दर्शन करें और उसका एक पत्ता खाकर निकलें।
वृश्चिक- किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए निकलने से पूर्व हनुमान जी को पान का बीड़ा चढ़ाएं।
धनु- सूर्यदशा की ओर मुख करते हुए नित्य नाभि और मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं।
मकर- हर शनिवार को उठते समय सबसे पहले खेजड़ी या पीपल के पेड़ पर जल चढाएं।
कुंभ- सात शनिवार दक्षिणामुखी हनुमान जी की परिक्रमा करें। अंत में गुड़ चने का प्रसाद चढ़ाकर हनुमान चालिसा का पाठ करें।
मीन- सात गुरुवार छोटी कन्याओं को गुड़ और भीगे चनों का प्रसाद बांटे।
यदि आप चाहते हैं आपकी हर एक मनोकामना पूरी हो तो आपकी राशि के अनुसार नीचे लिखें टोटको को पूरी श्रद्धा से अपनाएं निश्चित ही आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
मेष- ग्यारह हनुमान जी को सिन्दूर का चोला चढ़ाएं या वर्ष में एक बार हनुमान जी के किसी मन्दिर में रामध्वजा लगवाएं।
वृषभ- ग्यारह शुक्रवार लक्ष्मीजी या देवी के मन्दिर में खुशबु वाली अगरबत्ती चढ़ाएं और खीर का प्रसाद बांटे।
मिथुन- रोज कुछ भी खाने से पूर्व इलायची और तुलसीदल गणपति के स्मरण के साथ सेवन करें।कर्क- भगवान शिव को हर सोमवार को मीठा दूध चढ़ाएं।
सिंह- जल में रोली और शहद मिलाकर रोज सूर्यदेव को तांबे के लोटे से अघ्र्य दें।
कन्या- २१ बुधवार गणेश जी को दूर्वा, गुड़ व साबुत मूंग चढाएं।
तुला- शुभ कार्य के लिए निकलने से पहले तुलसी के दर्शन करें और उसका एक पत्ता खाकर निकलें।
वृश्चिक- किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए निकलने से पूर्व हनुमान जी को पान का बीड़ा चढ़ाएं।
धनु- सूर्यदशा की ओर मुख करते हुए नित्य नाभि और मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं।
मकर- हर शनिवार को उठते समय सबसे पहले खेजड़ी या पीपल के पेड़ पर जल चढाएं।
कुंभ- सात शनिवार दक्षिणामुखी हनुमान जी की परिक्रमा करें। अंत में गुड़ चने का प्रसाद चढ़ाकर हनुमान चालिसा का पाठ करें।
मीन- सात गुरुवार छोटी कन्याओं को गुड़ और भीगे चनों का प्रसाद बांटे।
Saturday, January 1, 2011
महामृत्युंजय मंत्र
शिव का महामृत्यंजय रूप पीड़ा और दु:खों से मुक्त कर सुख और आनंद देने वाला माना गया है। शिव के इस कल्याणकारी रूप की भक्ति और साधना के लिए महामृत्युंजय मंत्र के जप को बहुत ही शुभ और सिद्ध माना गया है। पुराणों में इसे मृत संजीवनी मंत्र बताया गया है। इस मंत्र के असर और शक्ति का महत्व दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य ने महर्षि दधीचि को बताया था।धार्मिक मान्यताओं में महामृत्युंजय मंत्र ऐसा सिद्ध मंत्र जिसके जप या उच्चारण मात्र से ही कड़ी से बड़ी विपत्ति से छुटकारा मिल जाता है। यह मंत्र न केवल अकाल मौत और मृत्यु भय से बचाता है। बल्कि इसके जप मात्र से कुंटुब की भी रोगों और और शत्रुओं से रक्षा भी होती है। दौलत, वैभव, मान-सम्मान भी इस मंत्र के प्रभाव मिल जाता है।शिव उपासना के विशेष दिन सोमवार, प्रदोष, अष्टमी, चतुर्दशी पर शिव पूजा के साथ इस मंत्र का जप बहुत ही सिद्ध माना जाता है। महामृत्युंजय का यह सिद्ध मंत्र इस प्रकार है -
ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम।
उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात।।
इस मंत्र के जप की अलग-अलग प्रयोजन के लिए नियत संख्या बताई गई है। जिसे किसी विद्वान ब्राह्मण से विधि-विधान, हवन और ब्रह्मभोज के साथ कराया जाना शास्त्रों के मुताबिक सुनिश्चित फल देता है।
ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम।
उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात।।
इस मंत्र के जप की अलग-अलग प्रयोजन के लिए नियत संख्या बताई गई है। जिसे किसी विद्वान ब्राह्मण से विधि-विधान, हवन और ब्रह्मभोज के साथ कराया जाना शास्त्रों के मुताबिक सुनिश्चित फल देता है।
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